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प्यार न दुलार, चहारदीवारी के पार से बात कर रहे परिजन

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जयप्रकाश - फोटो : ORAI
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कदौरा। जैसे-जैसे कोरोना से संघर्ष के दिन बीतते जा रहे हैं वैसे-वैसे इसके प्रति जागरुकता भी बढ़ती जा रही है। स्थिति यह है कि अब तो गांव-कस्बे के लोग भी कोरोना के परिणामों को अच्छी तरह से जान चुके हैं, यही वजह है कि हजारों मील की दूरी तय कर लौटे अपनों को न तो गले लगा रहे हैं और न ही उनका माथा चूम दुलार कर रहे हैं, बल्कि आश्रय केंद्र के बाहर चहारदीवारी के दूसरी ओर खड़े होकर बात कर रहे हैं। पूरे दिन केंद्र के आसपास यही आवाजें सुनाई देती है कि बीमारी से बचना, अपना ध्यान रखना।
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बता दें कि थाना क्षेत्र के ग्राम बागी में अभी तक 40 मजदूर हरियाणा, दिल्ली, नोएडा, मुंबई, मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, गोरखपुर आदि स्थानों से लौटकर आए हैं। इन्हें घर भेजने के बजाए प्रशासन ने गांव के ही परिषदीय विद्यालय, आंगनबाड़ी केंद्र व पंचायत भवनों में ठहराया है। हरियाणा से लौटे जयप्रकाश कुशवाहा का कहना है कि मुसीबतें झेलकर अपने गांव तक आने के बाद भी अपनों से न मिल पाने का अफसोस तो है पर बीमारी ही ऐसी है कि क्या किया जा सकता है, उनकी वजह से परिवार को किसी तरह की तकलीफ न हो तो यह दर्द भी बर्दाश्त कर लेंगे।
गुजरात से लौटे मिसबाहउद्दीन ने बताया कि बागी के जिस स्कूल में वे रुके हैं, उससे कुछ ही दूरी पर उनका पूरा परिवार रहता है। फिर भी घर नहीं जा पा रहे हैं। घरवाले आते हैं और विद्यालय की चहारदीवारी की दूसरी तरफ से बात कर घर लौट जाते हैं। दोनों ही ओर से आखिरी शब्द यही होते है, बीमारी से बचना, अपना ध्यान रखना। केंद्र की व्यवस्था देख रहे प्रधान प्रतिनिधि विजयकांत तिवारी का कहना है कि बीमारी से बचाव के लिए इतनी सतर्कता तो बेहद जरूरी है।

कदौरा में स्कूल में रुके लोग पेड़ की छांव बैठकर समय बिताते- फोटो : ORAI

मिसवाहउद्दीन- फोटो : ORAI

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