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Jalaun News: सचिवालयों में महीनों से ताला, भटक रहे ग्रामीण

Wed, 10 Jul 2024 02:00 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, जालौन
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उरई। गांव की सरकार चलाने में जिले के अफसरों से लेकर प्रधानों तक की मनमानी जारी है। लाखों की लागत से बने पंचायत सचिवालयों में महिनों से ताला लटक रहा है। हालत यह है कि छोटे छोटे कार्यों के लिए लोगों को रुपये खर्च कर शहर व कस्बों में जाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
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लोगों का कहना है कि शिकायतें करने पर आला अधिकारी भी इस पर कोई ध्यान नहीं देते हैं। जिससे ग्रामीणों को भटकना पड़ रहा है। आज भी लोग ब्लॉक व तहसील के चक्कर लगा रहे हैं। डीपीआरओ राम अयोध्या प्रसाद का कहना है कि पंचायत सचिवालयों के संचालन में जो दिक्कतें आ रही हैं, उन्हें जल्द दूर कराया जाएगा। यह भी पता लगाया जाएगा कि जहां पंचायत सहायक तैनात हैं और सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त हैं। फिर भी पंचायत सचिवालयों से काम क्यों नहीं हो रहा है, यदि लापरवाही मिली तो कार्रवाई की जाएगी

केस - एक
फोटो - 21 ब्लॉक के भेड़ी खुर्द में लटक रहा ताला। संवाद
शिकायतों के बाद भी कोई सुनवाई नहीं
कदौरा। ब्लॉक क्षेत्र के 71 ग्राम पंचायतों में सचिवालय बने है, शासन का आदेश है कि प्रतिदिन सचिव और पंचायत सहायक बैठ कर ग्रामीणों की समस्याओं को सुने और उनका निस्तारण करने का प्रयास करे, लेकिन सचिवालय में ताला पड़ा होने के कारण ग्रामीण समस्याओं के निस्तारण के लिए ब्लॉक और तहसील के चक्कर लगाते हैं। ब्लॉक क्षेत्र के अधिकतर सचिवालय में ताला लटका रहता है। शिकायतों के बाद भी कोई सुनवाई नही होती है। पंचायत सहायक प्रति माह बिना कार्यों के मानदेय ले रहे है। ब्लॉक के मबई ब्राह्मण व भेड़ी खुर्द में सचिवालय में ताले लटकते हुए पाए गए। लोगों का कहना है कि कभी भी सचिवालय नहीं खुलते हैं।
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केस - दो
फोटो -22 गोराकरनपुर में बंद सचिवालय। संवाद
सचिवालय पर नाम तक अंकित नहीं
कोंच। ब्लॉक के गोरकरनपुर के सचिवालय का बुरा हाल है। महीनों से यहां ताला लगा है। ग्राम प्रधान ने सचिवालय पर नाम तक अंकित नहीं कराया है। ग्रामीणों के काम प्रभावित हो रहे है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार ग्राम प्रधान व सचिव से इसके बारे में जानकारी की, लेकिन कोई उचित जबाव नहीं मिला। लगातार सचिवालय में ताला पड़ा रहता है। जिससे मजबूरी में किराया लगाकर पूरा दिन बर्बाद करने के बाद शहर में कागज बन पाते हैं। इसके साथ ही गांव में कई लोगों को सचिवालय कार्यालय की जानकारी ही नहीं है।
केस - तीन
फोटो - 23 चमारी के सचिवालय में बंद ताला। संवाद
महीनों से नहीं बैठ रहीं पंचायत सहायिका
उरई। कदौरा ब्लॉक के ग्राम पंचायत चमारी में महीनों सचिवालय में तैनात पंचायत सहायिका नहीं बैठी हैं। जिससे गांव के लोग अपने कागजों को गांव में नहीं बनवा पाते हैं। मजबूरी में लोग शहर आते हैं, जिससे उन्हें कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। लोगों का कहना है कि कई बार इसकी शिकायत की गई। लेकिन इसके बाद भी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। पंचायत सहायिका गांव में ही नहीं रहती हैं, जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है और वह हमेशा बंद ही बना रहता है।
केस - चार
फोटो - 24 मंगरौल का बंद पड़ा सचिवालय। संवाद
कभी नहीं खुलता सचिवालय
कालपी। महेबा ब्लॉक के मंगरौल में बना पंचायत सचिवालय हमेशा बंद रहता है। ग्रामीण राजकुमार, नितिन, सुनील, अमित आदि ने बताया की ताला कभी नहीं खुलता है, कुछ दिन पहले यहां पर 3 सदस्यीय जांच कमेटी भी आई थी तब भी गांव में बना पंचायत सचिवालय नहीं खोला गया। ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम प्रधान व ग्राम पंचायत सहायक अपनी मनमानी करतें हैं जिससे उन्हें सराकरी योजनाओं की जानकारी नहीं हो पाती है, साथ ही छोटे-छोटे कार्यों के लिए उन्हें शहर जाना पड़ता है।
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