उरई। कन्नौज की घटना के बाद एक बार फिर प्रदेश में टूरिस्ट बसों की डग्गामारी की चर्चा जोरों पर है। स्थिति यह है कि टूरिस्ट बसों की डग्गामारी आम यात्रियों की जिंदगी पर भारी पड़ रही है। प्रशासनिक अधिकारियों की अनदेखी से यह बसें बिना मानक व बिना सुरक्षा इंतजामों के साथ सड़कों पर फर्राटा भर रही है, जो आए दिन हादसों का कारण बन रही है। जिले से भी आधा सैकड़ा बसें यात्रियों को ला और ले जा रही है, जिनमें किसी भी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता।
बता दें कि कन्नौज में टूरिस्ट बस बड़े हादसे का शिकार हुई है। जिसमें कई सवारियों की मौत हो गई है। हादसे के बाद एक बार फिर इन बसों पर सुरक्षा के सवाल उठ रहे हैं। जिले से भी निकलने वाली इन बसों की स्थिति डग्गामार वाहनों से ज्यादा भयावह नजर आती है। स्थिति यह है कि बसों में मात्र 35 से 40 सवारियों के बैठने की जगह है, लेकिन बस संचालक व स्टाप अधिक मुनाफा कमाने के चक्कर में दो गुने से भी अधिक सवारियां बसों में भर लेते है। इसके बाद झांसी कानपुर के यात्री भी इन बसों को अपना मुख्य साधन बनाए है। जिले से इंदौर, इटारसी, गुजरात, राजकोट, ग्वालियर, दिल्ली आदि रूटों की प्रतिदिन आधा सैकड़ा बसें निकलती हैं। इन बसों की स्थिति किसी से छिपी नहीं है, लेकिन फिर भी प्रशासनिक अधिकारियों का ध्यान इन बसों की ओर नहीं जाता, जबकि जिले में टूरिस्ट बसों को लेकर दर्जनों हादसे हो चुके हैं, लेकिन फिर भी इन बसों के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई नहीं हुई। जिससे इन टूरिस्ट डग्गामार संचालकों के हौसले बुलंद है।
एआरटीओ मनोज कुमार कहते हैं कि जिले में लगातार अभियान चलाकर अनाधिकृत रूप से संचालित वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। जिले में इस तरह के अनाधिकृत 25 से 30 वाहनों का चालान प्रति माह किया जा रहा है। आगे और सख्त अभियान चलाकर इन पर नकेल कसी जाएगी। -मनोज कुमार, एआरटीओ
इमरजेंसी गेट में भी लगाते हैं सीट
बस संचालक बस में अतिरिक्त सवारियां बैठाने के लिए इमरजेंसी खिड़की पर भी सीट फिट करा देते है, जिससे बस में अतिरिक्त सवारियां बैठ सके। इमरजेंसी खिड़की बंद होने से बस में फंसे लोग बाहर नहीं निकल पाते हैं और हादसों में अत्यधिक नुकसान होता है।
नियम विरुद्ध जगह-जगह से भरते हैं सवारियां
मानकों के अनुसार, टूरिस्ट बसें एक स्थान से लेकर सीधे दूसरे स्थान पर सवारियों को ला और ले जा सकती है, लेकिन यह डग्गामारी करते हुए रास्तों में पड़ने वाले सभी जिलों से बसों को उठाते है।
ऊंची पहुंच के चलते नहीं होती कार्रवाई
जानकारों की माने तो दिनों दिन बढ़ती ट्रैवल्स की एक भी बस यातायात नियमों का पालन नहीं करती, लेकिन सब कुछ जानने के बाद न तो जिले स्तर पर कोई कार्रवाई होती है और न ही बस जहां से संचालित होती हैं वहां का प्रशासन इन बसों पर कार्रवाई करता है। एक बस करीब दो से तीन प्रदेशों की सीमा व जिलों से होकर गुजरती है, लेकिन बस संचालकों की ऊंची पहुंच के चलते एक भी जिले में इन पर कोई कार्रवाई नहीं होती।
कुठौंद में भी हुआ था बस हादसा
जिले से दिल्ली रूट के लिए दर्जनों बस चलती है, जिनमें न तो मानक पूरे होते है और न ही बस संचालक निमयों पर ध्यान देते हैं। अभी हाल ही में कुठौंद में फौजी बस ट्रैवल्स की बस पलट गई थी, जिसमें करीब 40 सवारियां घायल हो गई थी। इस बस पर भी आरोप लगे थे कि बस को क्लीनर चला रहा था, लेकिन अधिकारियों के सख्त कार्रवाई का आश्वासन देने के कुछ दिनों बाद मामले को रफा दफा कर दिया गया।
रात में क्लीनर बनते हैं चालक
यात्रियों की मानें तो ट्रैवल्स बसों में रात को क्लीनर ही बसों को हाईवे पर दौड़ाते है और अगर सवारी इसका विरोध करे तो बस स्टाफ लड़ने पर उतारू तो जाता है। स्थिति यह है कि कई यात्रियों ने बस के आफिसों में इसके लिए शिकायत दर्ज कराई, लेकिन जिम्मेदारों ने इस पर ध्यान नहीं दिया।