उरई। केंद्र सरकार के सदन में पारित किए गए कृषि बिल( विधेयकों)के विरोध में भारतीय किसान यूनियन ने कलक्ट्रेट में नारेबाजी की। भाकियू नेताओं ने कहा कि सरकार कृषि क्षेत्र में कंपनी राज लागू करना चाहती है। इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। भाकियू नेताओं ने इन विधेयकों के वापस लेने की मांग करते हुए प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन एसडीएम को सौंपा।
भाकियू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बलराम लंबरदार ने कहा कि इन विधेयकों (बिल)से किसानों को बंधुआ बनाए जाने का खतरा सता रहा है। कई राज्यों की सरकारें इनका विरोध कर रही हैं। कृषि विधेयकों का वापस लिया जाए। नहीं तो किसान विरोध जारी रखेंगे। भाकियू जिलाध्यक्ष ब्रजेश राजपूत ने सिंचाई, बिजली, बीमा कंपनी की मनमानी के मुद्दों को उठाया। नहरों का संचालन जल्द शुरू करने की मांग की। कहा कि सिंचाई के इंतजाम न होने से खरीफ की फसलें पूरी तरह नष्ट हो गई हैं। नुकसान का सर्वे कराकर बीमा कंपनी से नुकसान की भरपाई कराई जाए। इस दौरान डॉ. केदारनाथ, डॉ. द्विजेंद्र सिंह, राममोहन निरंजन, भगवानदास, जेंटर सिंह, सुरेश चौहान, सतेंद्र भदौरिया, लल्लूराम, चतुर सिंह पटेल, राजू मलथुआ, देवकरन सिंह, चंद्रपाल सिंह आदि मौजूद रहे।
बिल वापस न होने पर सड़कों पर आंदोलन की चेतावनी
उरई। आम आदमी पार्टी ने किसान विरोधी विधेयकों (बिल) को वापस लेने की मांग कर नारेबाजी की। एसडीएम को ज्ञापन भी सौंपा गया। सोमवार को जगदीश गुप्ता, आदित्य चतुर्वेदी, अब्दुल सईद खान, हिमांशु, विकास राज, रामशंकर आदि ने कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार के सदन में पारित बिल किसानों की बदहाली में काला अध्याय जोड़ने का काम करेंगे। कृषि सेक्टर को प्राइवेट हाथों में लाने के लिए यह बिल पारित किए गए हैं। किसानों के हाथों से खेती को छीनने की साजिश की जा रही है। पार्टी ने चेतावनी दी कि उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से लाए गए किसान विरोधी बिलों को तत्काल वापस लिया जाए। ऐसा न होने पर पार्टी पूरे देश में किसानों के साथ मिलकर सड़कों पर संघर्ष करेगी।