कोंच। कभी सूखा तो कभी ओलावृष्टि की मार से पस्त किसान अभी भी कुदरत की मार से उबर नहीं पा रहे है। इस साल भी बारिश नहीं होने के कारण खरीफ की लगभग सभी फसलें चौपट हो गई हैं। किसानों का कहना है कि जो स्थिति बनी है उसमें लागत निकलना भी मुश्किल है। ऐसे में कैसे घर चल पाएगा, यही सोच-सोच कर दिल बैठा जा रहा है।
रबी की फसलें ओलावृष्टि में गंवा चुके किसानों ने यह सोच कर कि उनके नुकसान की भरपाई खरीफ की फसल से कर किसी तरह घर गृहस्थी की गाड़ी चल निकलेगी। अपने खेतों को जुताई-बखराई करने के बाद बीज डाल दिया था।
शुरुआत में ठीक बारिश से उनके चेहरे खिल उठे थे और फसलें भी काफी अच्छी दिखाई दे रही थीं, लेकिन उस वक्त उनकी उम्मीदों पर पानी फिर गया जब आसमान पर आने वाले बादल बिन बरसे ही जाने लगे। लंबे अरसे से पानी की एक बूंद भी नहीं मिल पाने के कारण उड़द, मूंग, तिली जैसी फसलें सूखकर मुरझा गई। ग्राम रवा के किसान सत्येंद्र गुर्जर का कहना है कि ऐसी स्थिति में बहुत से किसानों ने सूख रहीं फसलों को जुताई के बाद बखराई कर दी है ताकि आगे रबी की फसल की समय से बुवाई कर सके।