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Jalaun News: झांसी-कानपुर मंडल प्रभारी पर अपमानित करने का आरोप, कोंच विधानसभा प्रभारी ने दिया इस्तीफा

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फोटो - 25 इस्तीफा देने वाले राजकुमार पड़रिया। संवाद - फोटो : पुलिस कार्यालय सभागार में आयोजित बैठक में मौजूद एएसपी व अन्य।
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कोंच। बहुजन समाज पार्टी में संगठनात्मक असंतोष अब खुलकर सामने आने लगा है। पार्टी के बड़े नेताओं की कार्यशैली से नाराज बसपा के कोंच विधानसभा प्रभारी राजकुमार पड़रिया ने अपने पद से इस्तीफा देकर राजनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है। उन्होंने पार्टी के झांसी-कानपुर मंडल प्रभारी लालाराम अहिरवार पर फोन पर अपमानित करने और वर्षों से कार्यकर्ताओं के शोषण का आरोप लगाया है।
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राजकुमार पड़रिया द्वारा राष्ट्रीय अध्यक्ष को भेजे गए त्यागपत्र के बाद स्थानीय बसपा संगठन में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच इसे संगठन के भीतर बढ़ती नाराजगी और गुटबाजी से जोड़कर देखा जा रहा है।



त्यागपत्र में राजकुमार पड़रिया ने लिखा है कि वह लंबे समय से पार्टी के समर्पित कार्यकर्ता रहे हैं। सेक्टर अध्यक्ष से लेकर कई बार विधानसभा प्रभारी जैसे महत्वपूर्ण दायित्व निभाते हुए उन्होंने संगठन को मजबूत करने का प्रयास किया, लेकिन अब हालात ऐसे बन गए हैं कि सम्मान के साथ कार्य करना संभव नहीं रह गया है।
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उन्होंने आरोप लगाया कि संगठन संबंधी मुद्दों को लेकर जब उन्होंने झांसी-कानपुर मंडल प्रभारी लालाराम अहिरवार से फोन पर बात की तो उन्हें अपमानित किया गया। इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी कहा कि लालाराम पिछले नौ वर्षों से विभिन्न पदों पर रहते हुए कार्यकर्ताओं की लगातार उपेक्षा और शोषण कर रहे हैं, जिससे जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं में भारी असंतोष है।



राजनीतिक जानकारों का मानना है कि लोकसभा चुनाव के बाद बसपा संगठन में कई क्षेत्रों में निष्क्रियता और अंदरूनी असंतोष की चर्चा लगातार सामने आ रही है। ऐसे समय में विधानसभा प्रभारी स्तर के नेता का खुलकर आरोप लगाते हुए इस्तीफा देना संगठन के लिए बड़ा संकेत माना जा रहा है।



सूत्रों की मानें तो कोंच और आसपास के क्षेत्रों में बसपा के कई कार्यकर्ता लंबे समय से संगठन में संवादहीनता और उपेक्षा की शिकायत कर रहे थे। हालांकि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की ओर से इस मामले में अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

राजकुमार पड़रिया के इस्तीफे को लेकर राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं हैं। माना जा रहा है कि आने वाले समय में यदि संगठन स्तर पर नाराज कार्यकर्ताओं को साधने का प्रयास नहीं हुआ तो इसका असर क्षेत्रीय राजनीति पर भी पड़ सकता है। इस मामले में लालाराम अहिरवार से संपर्क करने का प्रयास किया गया, पर उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।
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वर्जन

उन्हें सोशल मीडिया के माध्यम से इस्तीफे की जानकारी मिली है। उन्हें अभी तक कोई पत्र प्राप्त हुआ है और न ही राजकुमार पड़रिया ने उनसे संपर्क किया है।

- ब्रजेश जाटव, जिलाध्यक्ष, बसपा
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