माधौगढ़। जिन हाथों ने महीनों खेत में पसीना बहाकर गेहूं की फसल तैयार की अब वही किसान उपज बेचने के लिए धूप में दर-दर की ठोकरें खाने के लिए मजबूर हैं। आलम यह है कि सरकारी क्रय केंद्रों पर उठान न होने से तुलाई रुकी हुई है। मंडी में हजारों क्विंटल गेहूं खुले आसमान के नीचे पड़ा है।
हालत यह है कि जगह के अभाव में कई किसानों को बिना तुलाई कराए लौटाया जा रहा है। किसानों को चिंता सता रही है कि कहीं इस लेटलतीफी में उनका गेहूं खराब न हो जाए। बाद में इसे खराब बताकर केंद्र से रिजेक्ट कर दिया गया तो कहीं के नहीं रह जाएंगे। अभी तक बारदाने की कमी बताकर इनको टरकाया जा रहा था तो अब उठान न हो पाने की बात कही जा रही है।
खुद क्रय केंद्र प्रभारियों का कहना है कि यदि जल्द उठान की व्यवस्था नहीं हुई तो आगामी दिनों में खरीद व्यवस्था पूरी तरह चरमरा सकती है। केंद्रों पर भंडारण की जगह खत्म होने के कारण 29 मई के बाद तुलाई प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
मंडी परिसर में आरएफसी, सहकारी संघ माधौगढ़, सहकारी संघ सरावन, केंद्रीय उपभोक्ता भंडार तथा क्रय-विक्रय सहकारी समिति माधौगढ़ के गेहूं क्रय केंद्र संचालित हैं। शासन के निर्देशानुसार किसानों से 2585 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं खरीदा जा रहा है। इसके अलावा छनाई के नाम पर किसानों से 20 रुपये प्रति क्विंटल अतिरिक्त खर्च भी कराया जा रहा है। इसके बावजूद किसानों को समय पर तुलाई और भुगतान की सुविधा नहीं मिल पा रही।
केस-1-खुले में रखा दो हजार क्विंटल गेहूं
आरएफसी क्रय केंद्र प्रभारी अजय गौतम ने बताया कि केंद्र पर अब तक करीब सात हजार क्विंटल गेहूं की खरीद हो चुकी है, लेकिन उठान की धीमी व्यवस्था के कारण लगभग दो हजार क्विंटल गेहूं केंद्र के बाहर खुले में रखना पड़ा है। मौसम के बदलते मिजाज और बारिश की आशंका को देखते हुए पन्नी खरीदकर गेहूं को ढकने का प्रयास किया गया। इस पर करीब 10 हजार रुपये खर्च हुए। लेकिन बंदरों द्वारा पन्नियां फाड़ देने से गेहूं के खराब होने का खतरा और बढ़ गया है।
उन्होंने कहा कि कई बार उच्चाधिकारियों को स्थिति से अवगत कराया जा चुका है, लेकिन अब तक उठान की पर्याप्त व्यवस्था नहीं हो सकी है। यदि जल्द ट्रकों और गोदामों की व्यवस्था नहीं हुई तो खरीद कार्य प्रभावित होना तय है।
केस-2-अन्य केंद्रों पर भी बिगड़े हालात
सहकारी संघ सरावन के प्रभारी वासदेव सिंह और केंद्रीय उपभोक्ता भंडार के प्रभारी दीपेंद्र सिंह ने बताया कि उनके केंद्रों पर भी 200 से 250 क्विंटल तक गेहूं खुले में रखा हुआ है। भंडारण क्षमता पूरी हो चुकी है और नए किसानों की फसल रखने तक की जगह नहीं बची है। प्रभारियों का कहना है कि किसान लगातार केंद्रों पर पहुंच रहे हैं, लेकिन जगह के अभाव में उन्हें इंतजार करना पड़ रहा है। कई बार किसान नाराज होकर हंगामा भी कर चुके हैं।
यह बोले किसान
पहले से रखा उठेगा, तब होगी तुलाई
फोटो -10 रोहित सिंह।
अकबरपुरा निवासी किसान रोहित सिंह ने बताया कि वह पिछले दो दिनों से अपनी गेहूं से भरी ट्रॉली लेकर क्रय केंद्र के चक्कर काट रहे हैं। हर बार कर्मचारियों द्वारा यह कहकर वापस कर दिया जाता है कि पहले रखा गेहूं उठेगा, तभी नई तुलाई होगी। ट्रैक्टर और मजदूरों का खर्च अलग से बढ़ रहा है। भीषण गर्मी में खेत से मंडी तक गेहूं लाने के बाद भी यदि तुलाई न हो तो किसान आखिर जाए कहां।
हर बार नया बहाना, नुकसान सिर्फ किसान का
फोटो - 20 वीरभान सिंह।
हैदलपुरा निवासी किसान वीरभान सिंह ने नाराजगी जताते हुए कहा कि पहले बारदाने की कमी बताकर किसानों को रोका गया। अब बारदाना उपलब्ध हो गया तो जगह न होने का बहाना बनाया जा रहा है। सरकारी खरीद केंद्रों पर किसानों को राहत मिलने के बजाय परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं। यदि समय रहते तुलाई नहीं हुई और खरीद बंद हो गई तो किसानों को मजबूरी में कम दाम पर व्यापारियों को गेहूं बेचना पड़ेगा।
मौसम बिगड़ा तो बढ़ेगा नुकसान
किसानों और केंद्र प्रभारियों दोनों को सबसे ज्यादा चिंता मौसम को लेकर सता रही है। खुले में रखा हजारों क्विंटल गेहूं बारिश या आंधी आने पर खराब हो सकता है। इससे सरकारी नुकसान के साथ किसानों की मेहनत पर भी पानी फिर सकता है। किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि तत्काल उठान की व्यवस्था कराकर केंद्रों पर जगह खाली कराई जाए, ताकि शेष किसानों की गेहूं तुलाई समय पर हो सके और उन्हें आर्थिक नुकसान न उठाना पड़े।
वर्जन
सभी केंद्रों पर बारदाना उपलब्ध करा दिया गया है। केंद्र प्रभारियों की जिम्मेदारी है कि वे तुलाई व खरीद का कार्य जल्दी कराएं।
- गोविंद उपाध्याय, जिला कृषि विपणन अधिकारी
फोटो -10 रोहित सिंह।- फोटो : पुलिस कार्यालय सभागार में आयोजित बैठक में मौजूद एएसपी व अन्य।