पिछले साल की तबाही अभी किसान भूला भी नहीं है और इस साल भी जरा मौजे में
तबाही का मंजर दिखाई देने लगा है। जरा माइनर में छोड़ा गया पानी ओवरफ्लो हो
गया, जिससे खेतों में जलप्लावन की स्थिति बन गई। खेतों में खड़ी फसलों के
सड़ने की भी आशंका बन गई है। इसको लेकर किसान परेशान है।
दैवी आपदाओं
से जूझ रहे किसानों को सरकारी संसाधन भी चपत लगाने में जुटे हुए हैं। जरा
माइनर में पानी ओवरफ्लो होने से आसपास के खेत तालाब बन गये हैं। किसानों
की मटर, मसूर, चने, सरसों आदि की फसलें पानी में डूब गई हैं जिनके बचने के
अब कोई आसार नहीं दिख रहे हैं। किसानों की मानें तो वे पूरी तरह से बर्बाद
हो गए हैं। नहर विभाग के अधिकारियों को
इस बाबत अवगत कराया गया, लेकिन कोई
फायदा नहीं हुआ। माइनर का पानी अभी भी खेतो में जा रहा है। कृषक
रामकिशोर पुरोहित का कहना है कि माइनर की सफाई नहीं कराये जाने के कारण यह
हालात बने हैं, अगर ढंग से वाकई साफ सफाई
कराई गई होती तो किसानों को
नुकसान से बचाया जा सकता था। जरा निवासी लवेश पांचाल का कहना है कि उनकी
फसलें पूरी तरह से बर्बाद हो गई हैं और अब उनके सामने साल भर अपने बाल
बच्चों का पेट भरने की समस्या खड़ी है। किसान शोभा वर्मा भी इस जलप्लावन की
स्थिति को लेकर काफी असहज हैं।
क्या कहते हैं जिम्मेदार..
कोंच
के उपजिलाधिकारी संजयकुमार सिंह का कहना है कि फिलहाल यह बात उनके संज्ञान
में नहीं है लेकिन अगर ऐसा हुआ है तो वह अभी संबंधित नहर विभाग के
अधिकारियों को मौके पर भेजते हैं ताकि माइनर का पानी रोका जा सके।