जिले में गुरु गोविंद सिंह जयंती हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। राठ रोड स्थित
गुरुद्वारा में गुरु का दरबार सजाया गया। यहां पर गुरु ग्रंथ साहिब पाठ
के बाद भजन कीर्तन हुआ। शनिवार को जयंती पर सुबह प्रभातफेरी निकली गई।
दोपहर से लंगर का आयोजन किया गया। इसमें बड़ी संख्या में लोगों ने लंगर
छका।
बाबा सुरजीत सिंह ने बताया कि गुरु गोविंद सिंह ने अत्याचार के
खिलाफ आवाज उठाई। उनका मुख्य उद्देश्य था कि मानवता जिंदा रहे। उन्होंने
कभी भी जाति धर्म की बात नहीं कही। इतना ही नहीं जुल्म बंद हो इसके लिए
उन्होंने अपने परिवार को गवां दिया। उनका जन्म 16 दिसंबर सन् 1666 में पटना
में हुआ था। इन्होंने सिख धर्म में खालसा फौज की स्थापना की थी।
खालसा का
अर्थ पवित्रता से होता है इसीलिए उनका उद्देश्य था कि पवित्र फौज ही मानवता
को जिंदा रख कर कार्य कर सकती थी। शनिवार को गुरु गोविंद सिंह जयंती के
अवसर पर गुरुद्वारा में सुबह से प्रभात फेरी का आयोजन किया गया। धर्म से
जुड़े लोग गुरुगोविंद सिंह की झांकी पर फूल बरसाते हुए आगे बढ़े। घरों में
भी गुरु गोविंद सिंह की झांकी सजाई गई। गुरुद्वारे में
झांकी सजाई गई। इसके
बाद गुरुग्रंथ साहिब पाठ का आयोजन किया गया। पाठ के समापन के बाद भजन
कीर्तन करवाया गया और फिर भोग लगाया गया। दोपहर से भंडारे का कार्यक्रम देर
सायं तक चला। इस दौरान आज्ञा सिंह, ज्ञानी मुकेश सिंह, बाबा हर दयाल
सिंह, जसवंत सिंह, बाबा सुरजीत सिंह, अवतार सिंह, पुरुषोत्तम सिंह, नरेंद्र
जीत सिंह, हरदीप सिंह, सिमरन, गुरजीत कौर, अतिंदर कौर आदि मौजूद रही।