आटा। हमीरपुर में बुधवार को सड़क हादसे का शिकार हुए अधेड़ के परिजन ग्रामीणों को साथ लेकर सड़क पर उतर आए। हाथों में लाठी. डंडे और कुल्हाड़ी लेकर निकले ग्रामीणों ने मुआवजे की मांग पर चंडौत-कालपी मार्ग पर जाम लगा दिया। सूचना पर पहुंची आटा पुलिस से ग्रामीणों की तीखी झड़प और धक्कामुक्की भी हुई। इसके बाद आसपास के तीन चार थानों का फोर्स और तहसीलदार शशिवेंद्र दुबे मौके पर पहुंचे और परिजनों को सरकारी नौकरी का आश्वासन दिलाकर शांत किया। तब जाकर कहीं लगभग छह घंटे के बाद जाम समाप्त हो सका।
बता दें कि बुधवार की शाम आटा के कहटा गांव निवासी जूनियर हाईस्कूल में चतुर्थ श्रेणी कर्मी रामशंकर (45) को हमीरपुर के सरीला गांव के पास खदान को जा रहे मौरंग के ट्रक ने रौंद दिया था। उसकी बाइक भी क्षतिग्रस्त हो गई थी। गुरुवार की सुबह करीब साढ़े नौ बजे राम शंकर के परिजन कहटा के ग्रामीणों के साथ चंड़ौत कालपी मार्ग पर जाम लगाकर मुआवजे की मांग करने लगे। भीड़ में शामिल कई लोगों के हाथों में लाठी-डंडे और कुल्हाड़ी तक थी। सूचना पाकर आटा पुलिस मौके पर पहुंची और जबरन ग्रामीणों को हटाने लगी।
इस पर ग्रामीणों और पुलिस की तीखी झड़प के बाद धक्कामुक्की हो गई। हालात बिगड़ते देख मौके पर कदौरा और कालपी की भी पुलिस भेजी गई। पुलिस की ओर से काफी समझाने के बाद भी ग्रामीण बिना मृतक के आश्रित को नगद व सरकारी नौकरी दिलाने की मांग पर डटे रहे। कुछ देर बाद तहसीलदार भी जाम लगाए ग्रामीणों को समझाने पहुंचे। काफी देर बाद दोपहर लगभग साढ़े तीन बजे के आसपास जब तहसीलदार ने नौकरी दिलाने के प्रयास का आश्वासन परिजनों को दिया तब कहीं जाकर ग्रामीणों ने जाम हटाया। देर शाम हमीरपुर से शव आने पर भी पुलिस की निगरानी में उसका अंतिम संस्कार किया गया।
रामशंकर की मौत पर ग्रामीणों में इस कदर गुस्सा था कि एक बार तो आटा पुलिस के भी पैर जाम वाले मार्ग से उखड़ने लगे। पुलिस ने लाठी तानी तो ग्रामीण भी शोर मचाते ल्हुए लाठियां व कुल्हाड़ी लेकर दौड़ पड़े। इससे हालात तनावपूर्ण हो गए। बाद में आसपास के थानों का फोर्स बुलाकर ग्रामीणों को शांत कराया गया।
ग्रामीणों का आरोप है कि चंडौत कालपी मार्ग पर पूरे दिन ओवरलोड ट्रक मौत बनकर दौड़ते हैं। इन पर पुलिस की कोई रोक टोक नहीं है। खदान को जाने वाले इन ट्रकों से सड़क तो खस्ताहाल हो ही रही है। साथ-साथ आए दिन किसी न किसी हादसे में लोगों को या तो अपनी जान गंवानी पड़ती है या फिर विकलांग होना पड़ता है।
सड़क हादसे ने रामशंकर के परिवार पर मानो दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। दो बेटे अंकित (17) व संकित (15) और दो बेटियां खुशबू (14) व गीता (12) हैं। परिवार के लोगों ने बताया कि चारों बच्चे अभी पढ़ाई ही कर रहे हैं। परिवार में रामशंकर ही अकेला कमाने वाला था। अब परिवार की गुजर बसर कैसे होगी।
चंडौत कालपी मार्ग पर पूरे दिन मौरंग के ट्रकों के अलावा छोटे छोटे सवारी वाहनों का आवागमन रहता है। करीब छह घंटे लगे जाम के कारण जहां दोनों ओर खदान को आने जाने वाले ट्रकों की कतारें लग गई वहीं आटो, टेंपो और लोडर की सवारियां भी काफी परेशान रहीं। कुछ लोग तो पैदल ही अपने गांवों की ओर चल दिए।