जालौन। शतचंडी महायज्ञ में चल रही रासलीला में लेखराज रासमंडल श्रीधाम वृंदावन के कलाकारों ने मीराबाई की प्रभु श्रीकृष्ण से भक्ति दर्शाई।
मोहल्ला चुर्खीवाल में आयोजित शतचंडी महायज्ञ के छठें दिन लेखराज रास मंडल श्रीधाम वृंदावन की टीम के कलाकारों ने मीरा की भक्ति के प्रसंग को दर्शाया। रासलीला का शुभारंभ महाराजा मनु को वैराग्य के आभास के साथ हुआ।
इसके बाद वह अपने पुत्र उत्तानपाद का बाल्यावस्था में ही राजतिलक करके वन जाने की तैयारी करते हैं। जब वे पत्नी को अपना विचार बताते हैं तो वह भी उनके साथ चल पड़ती है। नैमिषारण्य तीर्थ पहुंचकर अपनी तपस्या आरंभ करते हैं। तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्मा, विष्णु, महेश उन्हे दर्शन देकर कहते हैं कि वह वर मांगे, लेकिन मनु वर लेने से इनकार कर देते हैं। इस प्रसंग का संदेश दिखाया गया कि मनुष्य को निस्वार्थ भाव से तपस्या करनी चाहिए।
अगले दृश्य में कृष्ण भक्त मीरा बाई का प्रसंग दर्शाकर दिखाया गया कि कैसे मीराबाई की भक्ति में बाधा डालते हुए राणा ने उन्हें विष का प्याला पिलाया और जहरीले सांपों से डसवाया, लेकिन प्रभु भक्ति में लीन मीरा का बाल भी बांका न हुआ। मीरा की भक्ति और उन पर हुए अत्याचारों को सुनकर पंडाल में बैठे दर्शकों की आंखें नम हो गईं। इससे पूर्व आयोजित भागवत कथा ने पं. रामश्याम तिवारी ने प्रभु श्रीकृष्ण के अवतरण व उनकी बाल लीलाओं की कथा सुनाई।