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जालौन: सैदनगर के डॉ संजय को मिला पद्मश्री, अस्थिरोग सर्जन हैं, उपलब्धि पर पूरा गांव गदगद

Tue, 09 Nov 2021 09:13 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

ग्रामीणों ने बताया गांव में डॉक्टर के परिवार के कई सदस्य रहते हैं। सभी को बधाई देने वालों का तांता सा लगा है। बता दें कि डॉ भूपेंद्र कुमार सिंह संजय प्रख्यात हड्डी रोग (सर्जन) हैं और इस वक्त उत्तराखंड के देहरादून में रहते हैं।
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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से पद्मश्री ग्रहण करते डॉक्टर बीकेएस संजय - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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जालौन के कोटरा कस्बे के एक छोटे से गांव सैदनगर में जन्मे और पढ़े बढ़े डॉ बीकेएस संजय को उनकी उत्कृष्ट चिकित्सा सेवा के लिए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पद्मश्री दिया है। गांव में डॉक्टर के सम्मानित होने की खबर पहुंचते ही लोगों में खुशी की लहर छा गई। ग्रामीणों का कहना है कि हालांकि डॉक्टर काफी समय से गांव में नहीं रहते हैं। फिर भी उनको मिले इस महत्वपूर्ण सम्मान ने सभी का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया है।
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वर्तमान में गांव में डॉक्टर के परिवार के कई सदस्य रहते हैं। सभी को बधाई देने वालों का तांता सा लगा है। बता दें कि डॉ भूपेंद्र कुमार सिंह संजय प्रख्यात हड्डी रोग (सर्जन) हैं और इस वक्त उत्तराखंड के देहरादून में रहते हैं। इनकी चिकित्सीय उपलब्धियों को देखते हुए इनका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड और लिम्का बुक रिकार्ड में एवं सामाजिक कार्यों के लिए इंडिया बुक ऑफ  रिकार्डस में भी आ चुका है।

डॉ संजय ने प्राथमिक ऑर्थोपेडिक शिक्षण एवं प्रशिक्षण पीजीआई चंडीगढ़ व उच्चस्तरीय शिक्षण एवं प्रशिक्षण दुनिया के कई देशों जैसे कि स्वीडन, स्विटजरलैंड, जापान, आस्ट्रेलिया, अमेरिका से प्राप्त की है। वे पीजीआई चंडीगढ़ में एसोसिएट प्रोफेसर व हिमालयन इंस्टीटयूट जॉली ग्रांट में प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष के पद पर भी कार्य कर चुके हैं।
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उन्हें जापान ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर, न्यूजीलैंड, अमेरिका एवं मलेशिया के विभिन्न विश्वविद्यालयों में व्याख्यान देने का गौरव भी प्राप्त हो चुका है। वर्तमान में वह उत्तराखंड के ऑर्थोपेडिक संघ के संस्थापक अध्यक्ष हैं। फिलहाल डॉ संजय उत्तराखंड चिकित्सा विश्वविद्यालय के कार्यकारणी परिषद के मनोनीत सदस्य हैं। डॉ संजय के पिता दयाराम पेशे से किसान थे।

जिनका करीब 20 वर्ष पूर्व स्वर्गवास हो चुका है। गांव वालों को जैसे ही डॉ संजय की उपलब्धि का पता चला तो उनकी खुशी का ठिकाना न रहा।
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