उरई। चार दिवसीय छठ महापर्व के तीसरे दिन परंपरागत व उत्साह के साथ अस्त होते सूर्य को अर्घ्य देकर पूजा अर्चना की तथा परिवार एवं समाज की खुशहाली व समृद्धि की कामना की। इस दौरान स्थानीय लोग भी छठ पूजा को देखने रामकुंड पहुंचे। छठ पूजा के दौरान आतिशबाजी भी की गई।
पहले दिन नहाय खाय, दूसरे दिन खरना के बाद छठ पूजा के तीसरे दिन शनिवार को डाला छठ जो दीवाली के छठवें दिन मनाया जाता है। इसमें अस्त होते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है और अगले दिन उगते हुए सूर्य को दूसरा अर्घ्य दिया जाता है। रामकुंड पर बिहारी व पूर्वांचल के लोगों ने विधिविधान से पूजा अर्चना की। बांस की बनी टोकरी व सूप, हल्दी, अदरक, नीबू, ईख, मूली, गाय का दूध, सुपारी, पान का पत्ता, केला, नारियल, सेव, अनार, अमरूद, सिंघाड़ा, शरीफा, मुसम्मी आदि के साथ घर में बनाया गया ठकुआ लेकर महिलाएं रामकुंड पहुंची। वहां पूरे विधि विधान के साथ बगैर पंडित के पानी में खड़े होकर ढलते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया।
छठ पूजा समिति के अध्यक्ष व शिक्षाविद संजय साहनी ने बताया कि यह पूजा बिना पंडित के की जाती है। इसमें समाज का कोई भी व्यक्ति कर सकता है, चाहे वो किसी भी धर्म का अनुयायी हो। छठ ऐसा पर्व है, जो हमें प्रकृति से जोड़ने का संदेश देती है। यह पूजा हमें सिखाती है कि पर्व नियम व संयम के साथ करें। यह पर्व मानव शरीर की शुद्धि के साथ हमारे समूचे परिदृश्य की स्वच्छता का भाव रखता है। संजीव साहनी, सुमन, श्वेता, मनीषा, हर्षिता ने बताया कि पहले दिन घर को पूरी तरह साफ सुथरा किया जाता है। इसके बाद व्रती महिलाएं व पुरुष शुद्ध शाकाहारी भोजन ग्रहण करते है। इसके बाद अगले 24 घंटे के लिए निर्जला व्रत करते ंहै। इस दौरान डा. संजय सिंह, डा. राजीव, केएम तिवारी, डिंपल, तारकेश्वर, दीनानाथ, ओपी श्रीवास्तव, मुकेश, अनिल, सुधाकर, जुगल, संतोष, श्यामजी, आनंद यादव, कृष्णकांत, नंदलाल, इंदु मिश्रा, मुन्नी, सुधा आदि मौजूद रहे।
गाते रहे छठ पूजा के गीत
छठी मइया जल्दी हमारे घर पधारो। पहला अरग ले रहे सूर्य देवता, खुशी-खुशी घर जाए। जल बीच दिहवा थर थर कांपे उगा हो सूरज देह। बेदिया बना ली है सूर्य देव घाट पर, लिख दिया सूरज देव का नाम। चारो पहर राती थल जल सेवइला। कांच ही बांस की बहिया। दरशन दिहीना आपन दीनानाथ, देखली न हमार हे दीनानाथ, जय छठी माई सर्व सुख सागर, जय छठ व्रत लोक उजागर जैसे गीत गाए।
नए जोड़े ने किया पहला व्रत
अनुज व अर्पिता का पहला छठ व्रत था। दोनों व्रत को लेकर खासे उत्साहित थे। उन्होंने सेल्फी ली। अर्पिचा ने बताया कि उसकी शादी इसी साल हुई है। पहली बार व्रत किया है। अच्छा लगा। उन्होंने सूर्य देवता से प्रार्थना कर घर परिवार की खुशियां मांगीं हैं।
छठ पूजा के दौरान सेल्फी लेती महिलाएं व युवतियां- फोटो : ORAI
रामकुंड पार्क में छठ महापर्व की तीसरे दिन छठ मैया की पूजा करती महिलाएं- फोटो : ORAI