पॉलीथिन पर प्रतिबंध के फरमान की पहले दिन ही धज्जियां उड़ती दिखीं। प्रतिबंध का कहीं पर भी कोई असर नहीं दिखा, पहले की ही तरह हर ओर पॉलीथिन का इस्तेमाल होता दिखा। दुकानों पर पॉलीथिन में सामान दिया गया।
मजे की बात यह रही कि कोई अफसर भी पॉलीथिन के प्रतिबंध को प्रभावी बनाने के लिए नहीं निकला। आम जनमानस भी इसके लिए तैयार नहीं दिखा। सामान लेने के लिए कोई भी झोला या बैग लेकर घर से नहीं निकला।
22 दिसंबर को राज्य सरकार ने पर्यावरण को साफ सुथरा रखने के लिए पॉलीथिन के निर्माण और बिक्री पर पाबंदी लगाने के आदेश जारी कर दिए थे। इसके लिए निर्माण करने वाली कंपनियों व दुकानदारों को 30 दिन का समय भी दिया गया था।
इस समय में वह डंप माल को सप्लाई कर सकें। लेकिन शासन की अधिसूचना पर कोई भी गंभीर नजर नहीं आया। गुरुवार से इस आदेश को पूरी तरह से प्रभावी करने का फैसला शासन ने लिया है। इसके लिए आलाधिकारियों को निर्देश भी जारी कर दिए हैं।
निर्देशों के बावजूद शहर में कोई भी अधिकारी गंभीर नजर नहीं आया। लिहाजा खुलेआम पॉलीथिन की बिक्री हुई। सब्जी की दुकान से लेकर परचून की दुकान तक में पॉलीथिन में ही सामान दिया गया। उधर, हाईकोर्ट के आदेश पर प्रदेश सरकार ने पॉलीथिन के निर्माण और बिक्री पर पाबंदी तो लगा दी, पर प्रतिबंध के साथ ही जागरूकता भी जरूरी है।
तभी इस आदेश का प्रभावी ढंग से पालन हो सकेगा। अभी तक अधिकांश लोगों को पॉलीथिन से होने वाले नुकसान के बारे में पूरी जानकारियां नहीं है। इसके चलते वह भी जागरूकता के अभाव में पॉलीथिन का इस्तेमाल करने में गुरेज नहीं करते। प्रतिबंध को प्रभावी करने के लिए जरूरी है कि अभियान चलाकर अधिक से अधिक लोगों को पॉलीथिन से स्वास्थ्य व पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव के बारे में जागरूक किया जाए।