उरई। राज्य विद्युत नियामक आयोग ने मंगलवार को बिजली दरों को लेकर वर्ष 2019-20 का टैरिफ आदेश जारी कर दिया है। जिससे बिजली की दरों में लगभग 12 फीसदी की बढ़ोतरी हो गई है। इस बढ़ोतरी का अतिरिक्त बोझ घरेलू व कामर्शियल उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। वहीं जिले के उपभोक्ताओं ने इस बढ़ोतरी के फैसले को पूर्णता गलत बताया है। उपभोक्ताओं का कहना है कि पेट्रोल व डीजल के दाम बढ़ने से पहले ही उनके घरों का मासिक बजट गड़बड़ा गया था। ऐसे में बिजली की बढ़ी दरों के कारण दोहरी मार से जूझना पड़ेगा।
शहर के उपभोक्ता राजू सरदार का कहना है कि बिजली विभाग सप्लाई में भी मनमाना रवैया अपनाए था, जब चाहे इमरजेंसी के नाम पर सप्लाई बंद कर दी जाती है। वह यहीं मनमानी वह बिजली की दरों में भी कर रहा है। दरें बढ़ने से उपभोक्ताओं को परेशानी होगी।
किसान नियामत उल्ला का कहना है कि वैसे भी किसान दैवी आपदाओं से जूझ रहा है। ऐसे में किसानों को बिजली फ्री करने का फैसला लेना चाहिए था, लेकिन सरकार ने इस बढ़ोतरी में किसानों को भी राहत नहीं दी। जिससे किसानों को भी इन बढ़ी दरों से जूझना होगा।
जिले के व्यापारी नितिन का कहना है वैसे ही हर वर्ग का व्यापार इस समय मंदी के दौर सेे गुजर रहा है। बीजार में भी अस्थिरता का माहौल है ऐसे में बिजली की दरें बढ़ाने का फैसला सरासर गलत है। इससे व्यापारियों पर अतिरिक्त मार पड़ेगी।
गृहिणी भावना का कहना है कि लगातार बढ़ती महंगाई से मध्यम वर्ग के लोग सबसे ज्यादा परेशान है। कभी पेट्रोल के दाम बढ़ते है तो कभी सब्जियों के, इससे इस महंगाई में घर चलाना मुश्किल हो गया है। ऐसे में बिजली की दरें बढ़ने से घर का बजट गड़बड़ा गया है।
भावना- फोटो : ORAI
राजू सरदार- फोटो : ORAI
नितिन सिंह- फोटो : ORAI