भले ही प्रदेश के मुखियाने बुंदेलखंड में सूखे से निपटने के लिए 24 घंटे
बिजली आपूर्ति के आदेश दे दिए हों, पर जिले के किसानों के लिए यह अभी भी
सपना है। तारों से लेकर ट्रांसफार्मर और अन्य मशीनरी तक पुरानी व दयनीय
स्थिति में हैं। इसके चलते लगातार फॉल्ट के चलते ग्रामीण क्षेत्रों में रोज
12 घंटे की आपूर्ति ही हो पा रही है। आएदिन ट्रांसफार्मर फुंकते
हैं। ऐसे
में इन पुराने उपकरणों के सहारे 24 घंटे बिजली की सप्लाई कैसे हो सकेगी? यह
सवाल किसानों के मन में है। बुंदेलखंड का किसान कई वर्षों से दैवी
आपदाओं से जूझ रहा है। इस वक्त सूखे की मार झेल रहा है। ऐसे स्थिति में
गुरुवार को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बुंदेलखंड में सूखे से निपटने के
लिए समीक्षा बैठक की थी। इसमें बुंदेलखंड के ग्रामीण क्षेत्रों
को 24 घंटे
बिजली सप्लाई का आदेश दिया था। इससे किसान खुशी तो हैं पर इउनके मन में
शंका भी है। कारण यह कि जिले में बिजली विभाग की स्थिति बहुत ही खराब है।
पूरा विभाग पुराने व जर्जर उपकरणों के सहारे है। मात्र दस से 12 घंटे की
आपूर्ति में ही रोज सैकड़ों फाल्ट और आएदिन ट्रांसफार्मर फुंकना आम है। ऐसे
में इन पुराने उपकरणों से दिन भर आपूर्ति
कैसे होगी? यह भी हो सकता है कि
24 घंटे बिजली आपूर्ति से कहीं ग्रामीण क्षेत्र के ट्रांसफार्मर व जर्जर
तार दम न तोड़ दें। ऐसा हुआ तो तो पूरे जिले के ग्रामीण क्षेत्रों की बिजली
व्यवस्था ही धड़ाम हो जाएगी। यही कारण है कि जिले के किसानों को 24 घंटे
बिजली के आदेश के बाद जितनी खुशी हो रही है उतना ही इसके अनुपालन को लेकर
संशय है। अब देखना यह
है कि आने वाले समय में क्या वाकई हकीकत के धरातल पर
यह आदेश लागू हो पाता है या सिर्फ कागजी आदेश बनकर रह जाता है?
वर्तमान बिजली रोस्टर
विभाग
के अधिकारी 24 घंटे बिजली आपूर्ति शुरू हो जाने का दावा तो कर रहे हैं, पर
अभी तक ग्रामीण क्षेत्रों की सप्लाई में कोई बदलाव नहीं हुआ है। अभी भी
शाम छह से नौ, सुबह नौ से एक बजे तक कटौती हो रही है। इसके अलावा फाल्ट व
अन्य तकनीकी कारणों से दो-तीन घंटे सप्लाई बाधित रहती है।
वर्जन
मुख्यमंत्री
का आदेश विभाग के पास आ गया है। आदेश का पालन करते हुए जिले के ग्रामीण
क्षेत्रों में 24 घंटे बिजली आपूर्ति शुरू कर दी गई है। अब ग्रामीण क्षेत्र
के किसानों को 24 घंटे बिजली की सप्लाई मिलेगी। -एसएस प्रसाद, अधीक्षण
अभियंता, बिजली विभाग