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केमिकल के इंतजार में 15 महीने से अटकी खून की जांच

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कदौरा। स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर होने के प्रशासनिक दावों से इतर हकीकत कुछ और ही है। स्थिति यह है कि कदौरा सीएचसी में खून की जांच के लिए लगी सीबीसी मशीन पिछले 15 महीनों से बंद है। इसकी वजह जांच के लिए केमिकल का न मिल पाना है। मजबूरी में मरीज निजी पैथोलॉजी से जांच कराते हैं। मरीज व तीमारदारों का आरोप है कि कई बार जांच शुरू करने की मांग की गई लेकिन कोई कोई सुनवाई नहीं हुई।
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बता दें कि कस्बे की सीएचसी में रोजाना 150 से 200 मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। इस सीएचसी में क्षेत्र के लगभग 36 गांवों के लोग स्वास्थ्य सेवाओं के लिए निर्भर है। 15 माह पहले यहां के मरीजों को जांच की सुविधा के लिए पैथालॉजी में सीबीसी मशीन स्थापित की गई थी। इस मशीन के बाद ग्रामीणों को लगा था कि उन्हें अब बेहतर उपचार मिलने लगेगा। पर इस मशीन की सुविधा चंद दिनों तक ही रही। इसके बाद से सीबीसी मशीन बंद है। डॉक्टरों का कहना है कि उनके पास केमिकल का अभाव है। इस कारण जांच नहीं हो पा रही है। मशीन बंद होने से क्षेत्र के मरीजों को निशुल्क जांच का लाभ नहीं मिल पा रहा है। चिकित्सा अधीक्षक अशोक कुमार ने बताया कि वह लगातार विभाग के उच्चाधिकारियों को केमिकल की आपूर्ति के लिए मौखिक व लिखित रूप से बताया जा चुका है। पर समस्या का हल नहीं हुआ है। केमिकल न मिलने परेशानी हो रही है। जल्द केमिकल मिलने का आश्वासन मिला है।
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सीबीसी मशीन से होने वालीं जांचें
डॉक्टरों ने बताया कि सीबीसी मशीन से संपूर्ण रक्त की जांच की जाती है। इसमें आरबीसी, डब्ल्यूबीसी, एमसीएच, प्लेटलेट्स, एमसीबी व अन्य जांचें होती हैं। सीबीसी में खून में उपस्थित कोशिकाओं की गिनती की जांच होती है। इससे यह पता चलता है कि खून में कोशिकाओं की संख्या सामान्य से कम है या अधिक।
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निरीक्षण के बाद भी नहीं सुधरे हालात
सीएचसी का समय-समय पर मंडल स्तर के अधिकारियों के अलावा सीएमओ डॉ. एनडी शर्मा निरीक्षण करते रहते हैं। पर अधिकारियों को सीएचसी में बंद पड़ी मशीन नजर नहीं आई। ग्रामीणों का कहना है कि निरीक्षण के दौरान अधिकारियों से शिकायत भी की गई लेकिन अब तक किसी ने सुध नहीं ली।
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फोटो-2-प्रदीप।
सिर्फ बुखार जांच कर दे देते हैं दवा
क्षेत्र के ग्राम बड़ागांव निवासी प्रदीप कुमार ने बताया कि सरकारी अस्पताल किसी मतलब का नहीं है। डॉक्टर बुखार नाप कर दवा दे देते हैं। ग्रामीण क्षेत्र होने की वजह से प्राइवेट में भी अच्छी जांच की कोई व्यवस्था नहीं है।
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फोटो-3-संजय।
बाहर जांच में अधिक खर्च होता है
कस्बे के संजय गौतम कहते हैं कि सीएचसी की सीबीसी मशीन खराब है। प्राइवेट लैब संचालक दोगुने रुपये लेते हैं। जिसमें सीएचसी के कर्मियों का भी कमीशन होता है।
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