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600 क्षय रोगियों को लिया गया गोद लिए

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उरई। वर्ष 2025 तक देश को क्षय रोग यानी टीबी मुक्त बनाने के क्रम में जिला भी अपना योगदान दे रहा है। इस क्रम में 600 रोगियों को अधिकारियों और विभिन्न सामाजिक संस्थाओं ने गोद लेकर उनके पोषण का जिम्मा उठाया है।
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डीएम प्रियंका निरंजन ने कहा कि राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की पहल पर हमारे जिले में क्षय रोगियों को गोद लेने की व्यवस्था शुरू की गई है। यह एक अच्छी पहल है। इससे समाज में बहुत ही सकारात्मक ऊर्जा का संचार होगा। हम सभी का प्रयास है कि क्षय रोगी भी जल्द स्वस्थ हों और अन्य स्वस्थ लोगों की तरह मुख्य धारा में जीवन यापन कर सकें। उन्होंने निर्देश भी दिया कि जो लोग क्षय रोगियों को गोद ले रहे हैं। वह सभी नियमित फोन कर मरीज या उसके परिजन से हालचाल अवश्य लें। सीएमओ डॉ. एनडी शर्मा ने बताया कि क्षय रोग एक गंभीर समस्या है। पर अब इसका उपलब्ध है। इसलिए डरने की जरूरत नहीं है। समय से उपचार होने पर यह बीमारी पूरी तरह से ठीक हो जाती है। उन्होंने कहा कि जिला क्षय रोग अधिकारी सुनिश्चित करें कि टीबी मरीज के पते और संपर्क नंबर सही से दर्ज हो। इससे मरीज से आसानी से संपर्क किया जा सकेगा।
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समय पर इलाज कराकर दे सकते हैं मात
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. सुग्रीव बाबू ने विश्व क्षय रोग दिवस के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भारत सरकार की ओर से 2025 तक देश को टीबी मुक्त करने की योजना है। समय पर यदि लक्षण देखकर जांच कराने के बाद शुरू करा ले तो हम हर हाल में क्षय रोग को मात दे सकते हैं।
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मुझे सेवा का मौका मिला
क्षय रोगी को गोद लेने वाली ममता ने कहा कि मुझे मानव सेवा की सीख अपने माता-पिता से मिली है। मैं अपने को बड़ा ही सौभाग्यशाली मानती हूं कि मुझे इन क्षय रोगियों की सेवा करने का अवसर मिल रहा है। पूरा प्रयास रहेगा कि इन रोगियों की दवा और जांच नियमित रूप चलती रहे।
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राज्यपाल का इस पहल के लिए धन्यवाद
गोद लिए गए सुमित (काल्पनिक नाम) ने बताया कि मुझे गत चार महीने से क्षय रोग है। जांच के बाद दवा और निक्षय योजना से 500 रुपये प्रति माह मिल रहा है। पर आज इस बात की खुशी है कि जब सब लोग मेरा इतना ध्यान देंगे तब तो मैं और जल्दी ही स्वस्थ हो जाऊंगा। मेरी तरफ से राज्यपाल महोदया को धन्यवाद कि उनकी पहल से प्रदेश के क्षय रोगियों को गोद लिया जा रहा है।
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2019 में मिले थे सबसे ज्यादा मरीज
जनपद में वर्ष 2018 में 3657, वर्ष 2019 में 4027, वर्ष 2020 में 2516, वर्ष 2021 में 2683 टीबी से ग्रसित मरीज तलाशे गए थे। टीबी से ग्रसित मरीजों की स्क्रीनिंग में सरकारी कर्मियों और स्वयं सेवी संस्थानों ने भी सहयोग किया है।
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