उरई। यूपी बोर्ड परीक्षाओं के मूल्यांकन का काम शहर के तीन कालेजों में चल रहा है। मूल्यांकन कर रहे शिक्षकों ने स्वीकार किया कि कोरोना काल में बच्चों की पढ़ने-लिखने की क्षमता प्रभावित हुई है। हालत यह है कि बच्चों ने बड़े प्रश्नों के उत्तर भी संक्षिप्त कर दिए हैं। मूल्यांकन के समय इस बात का भी ध्यान रखा जा रहा है कि बच्चों के हित प्रभावित न हों।
शहर के जीआईसी, सनातन धर्म इंटर कालेज और गांधी इंटर कालेज में मूल्यांकन का काम तेजी से चल रहा है। जीआईसी के प्रधानाचार्य रमेश चंद्र वर्मा ने बताया कि उनके केंद्र पर 1,13,240 कापियों के आवंटन का लक्ष्य था। इसमें 1,03,509 कापियां आईं हैं। अब तक 43,506 कॉपियों का मूल्यांकन हो चुका है। इसी तरह गांधी इंटर कालेज में 56,409 और सनातन धर्म इंटर कालेज में 63,099 कापियां मूल्यांकन के लिए आई थी। इन दोनों केंद्रों पर मूल्यांकन अंतिम दौर में है। हालांकि मूल्यांकन का काम तीन मई तक चलेगा। उन्होंने बताया कि बोर्ड परीक्षा के लिए शासन स्तर से पाठ्यक्रम में कटौती कर दी गई थी। बच्चों ने अपनी क्षमता के आधार पर काम किया है।
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फोटो-11-शैलेश मिश्रा।
हिंदी की कापियों का मूल्यांकन कर रहे शिक्षक शैलेश कुमार मिश्रा ने बताया कि हालांकि कोर्स कम हो गया था पर उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में यह बात समझ में आ रही है कि परीक्षार्थियों ने बड़े-बड़े प्रश्नों का उत्तर भी संक्षिप्त कर दिया। कहीं न कहीं कोरोना से बच्चों की लेखन क्षमता प्रभावित हुई है।
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फोटो-12-जितेंद्र।
अंग्रेजी की उत्तर पुस्तिकाएं जांच रहे शिक्षक जितेंद्र कुमार ने बताया कि कोरोना के कारण दो साल बच्चों की पढ़ाई प्रभावित रही। इस साल विधिवत परीक्षाएं हुई हैं। अधिकांश बच्चों ने ऑनलाइन पढ़ाई की है। कुछ महीने ही स्कूल खुले हैं। इसकी वजह से बच्चों की लिखने की क्षमता पर असर पड़ा है।