जालौन। नगर के लोगों को काफी लंबे समय से रेल लाइन की आस लगी है। लोगों को उम्मीद है कि अबकी रेल बजट में शायद नगर की जनता को रेल लाइन की सौगात मिल जाए तो क्षेत्र जनता के लिए खुशी की बात होगी।
बता दें कि नगर को रेलवे लाइन से जोड़े जाने की पूरी कार्य योजना प्रस्तावित है। कोंच से फफूंद वाया जालौन (89.68 किमी) एवं महोबा से भिंड वाया जालौन (217 किमी) दोनों रेलवे लाइनों का सर्वे पूर्व में ही हो चुका है। प्रस्तावित नई रेल लाइन की सर्वे रिपोर्ट रेलवे बोर्ड की ब्लू बुक 2010-11 में सम्मिलित है। इस रेल लाइन के लिए प्रस्तावित एस्टीमेट क्रमश: 793.78 करोड़ तथा 1718.81 करोड़ रुपये का है। रेल लाइन के निर्माण के लिए अभी तक वर्ष बजट जारी नहीं हो पाया।
लगभग चार वर्ष पूर्व रेल लाओ स्वाभिमान बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले तहसील गेट के सामने 4 मार्च 2016 से नगर के राजनेताओं और समाजसेवियों की अगुवाई में जन आंदोलन की शुरुआत हुई थी। 4 मार्च 2016 को रेल आंदोलन का पहला चरण नगर की ऐतिहासिक बाजारबंदी के साथ शुरू हुआ था। इसके बाद 8 मार्च 2016 से 29 अप्रैल 2016 तक चले क्रमिक अनशन किया था। जब प्रशासन ने इसका भी संज्ञान नहीं लिया तब आंदोलनकारियों में समाजसेवी हाजी मंसब खां, वरिष्ठ अधिवक्ता असलम सिद्दीकी, प्रदुम्न दीक्षित, इमरान अंसारी ने 30 अप्रैल 2016 से आमरण अनशन शुरू किया गया।
2 मई 2016 को तत्कालीन डीएम संदीप कौर, एसपी बब्लू कुमार व डीआरएम प्रतिनिधि रेलवे के मंडलीय अभियंता एमके मिश्रा ने अनशन स्थल पर आकर नगर को रेलवे लाइन से जोड़े जाने के लिए अपने स्तर से हर संभव प्रयास करने का आश्वासन देकर आंदोलन समाप्त कराया था। सांसद भानुप्रताप वर्मा ने भी लोकसभा में नगर को रेलवे लाइन की सौगात दिए जाने की मांग उठाई थी।
चंद्रप्रकाश यादव, गौरीश द्विवेदी, हाजी मंसब खां, नारायण सिंह सेंगर, सुरेश राव डेंगरे, जावेद अख्तर, लोकेंद्र सिंह यादव, सोमिल याज्ञिक, वसीउर्रहमान सिद्दीकी,अधिवक्ता उमेश दीक्षित, भूपेंद्र लिटौरिया ने जल्द रेलवे लाइन की सौगात देने की मांग की।