उरई। साथियों के साथ सुबह सैर पर निकले किशोर को मिट्टी से लदे तेज रफ्तार ट्रैक्टर ने रौंद दिया। जबकि उसके दो साथियों ने सड़क किनारे खंदक में कूदकर अपनी-अपनी जान बचाई। गंभीर हालत में घायल किशोर को जिला अस्पताल लाया गया। जहां से झांसी ले जाते समय रास्ते में उसकी मौत हो गई। गुस्साए ग्रामीणों ने घटनास्थल पर जाम भी लगाया। पुलिस ने पहुंचकर भीड़ को समझाबुझा कर मामला शांत कराया। मृतक किशोर नाना के घर आया हुआ था।
सिरसाकलार थाना क्षेत्र के छोटी मड़ैया निवासी जितेंद्र कुमार का 13 वर्षीय पुत्र साहिल उर्फ हिमांशु 15 दिन पहले शहर कोतवाली क्षेत्र के गढऱ गांव में नाना रामरतन के घर आया था। शुक्रवार की सुबह गांव स्थित प्राइमरी स्कूल के पास गांव के ही मयंक, गिप्पी के साथ सुबह सैर करने निकला था।
तभी पीछे से मिट्टी लदे ट्रैक्टर ने उसे टक्कर मार कर रौंदते हुए निकल गया। उसके साथियों ने सड़क किनारे खंदक में कूदकर अपनी जान बचाई। हादसे से गांव में अफरातफरी मच गई। परिजन आननफानन में उसे लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। जहां उसे झांसी रेफर किया गया। झांसी पहुंचने से पहले ही हिमांशु की मौत हो गई।
आक्रोशित ग्रामीणों ने मिट्टी लादकर जा रहे पांच ट्रैक्टरों को पंचर कर जाम लगा दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि मिट्टी के अवैध खनन में लगे ट्रैक्टर अक्सर हादसों का कारण बनते हैं। पुलिस ने ग्रामीणों समझा बुझाकर जाम खुलवाया। जाम करीब एक घंटे तक लगा रहा। सभी ट्रैक्टर चालक मौके से फरार हो गए। पुलिस का कहना है कि चालक की तलाश की जा रही है।
नाना के कपड़े खून से सराबोर
हादसे के बाद मौके पर पहुंचे हिमांशु के नाना उसे सीने से लगाकर ही अस्पताल की ओर दौड़ पड़े। लोगों ने उन्हें गाड़ी में बैठाया पर जिला अस्पताल से लेकर झांसी जाते वक्त तक वे अपने नवासे को सीने से ही लगाए रहे। इस कारण उनके कपड़े खून से सराबोर हो गए। बदहवास नाना को जिसने भी उन कपड़ों में देखा, उसका दिल दहल गया।
नाना अब नहीं बचूंगा
परिजनों ने बताया कि ट्रैक्टर के तीनों पहिये हिमांशु को रौंदते हुए निकल गए थे। मौत से पहले वह बेहोश तक न हुआ था। गंभीर रूप से घायल स्थिति में वह नाना से पानी तो कभी बिस्कुट मांगता रहा। झांसी के पास पहुंचने पर उसके आखिरी शब्द थे कि नाना अब वह नहीं बचेगा। इसके बाद ही उसने हमेशा के लिए आंखे मूंद ली।
हादसे को देख साथी बदहवास
हिमांशु के साथ हुए हादसे को देखकर उसके दोनों साथी पूरे दिन बदहवास हालत में रहे। घरवाले बार- बार पूछते रहे कि घटना कैसे हुई पर दोनों गुमसुम रहे। किसी की जुबान तक नहीं खुली। लेकिन उनकी आंखों में अपने साथी को खोने का गम और हादसे का खौफ साफ नजर आ रहा था।
क्या मालूम था कि छिन जाएगा बेटा
मृतक की मां नीतू ने बताया कि हिमांशु घर में सबसे बड़ा था। उसकी एक बहन अंशिका व एक भाई अक्षत भी है। पिता किसानी करते है। हिमांशु नाना के घर जाते समय कह गया था कि कुछ दिन बाद लौट आएगा। क्या मालूम था कि कलेजे का टुकड़ा हमेशा के लिए छिन जाएगा। पिता भी पोस्टमार्टम हाउस के एक कोने में बैठकर फफकते रहे।