इस बार मौसम में उतार चढ़ाव के बीच आम में समय से पहले ही बौर आ गया है।
किसान समझ नहीं पा रहे हैं कि वे खुश हों या परेशान। उन्हें इस बात की
आशंका भी है कि कहीं पहले बौर आने के बाद मौसम में हो रहा परिवर्तन इन
बौराए आम के पेड़ों को नुकसान न पहुंचा जाए। गौरतलब है कि पिछले वर्ष भी
मौसम के खराब होने से आम की फसल को खासा
नुकसान पहुंचा था। किसानों का कहना
है कि अभी तक के मौसम को देखते हुए लग रहा था कि गेेहूं के साथ चना व अलसी
की फसल भी बर्बाद हो जाएगी लेकिन बूंदाबांदी होने से थोड़ी राहत मिली।
गांव मुहम्मदाबाद के 65 वर्षीय किसान महपाल राजपूत ने बताया कि इतने दशकों
में हर तरीके के बदलाव देखे पर इस साल जनवरी के मध्य में ही आम के
पेड़ाें
में बौर आने शुरू हो गए। ऐसा पहले कभी नहीं देखा। बताया कि वसंत पंचमी के
पहले आम में बौर का आना किसानों और आम की फसल के लिए अच्छे संकेत हैं।
डकोर, कुसमिलिया एवं ददरी, खरका के किसानों का कहना है कि मौसम में स्थिरता
न होने के कारण कई पेड़ों में आये बौर में कीड़ा लग गया है मगर इस बार आम
की पैदावार अच्छी होने की उम्मीद है।
देखरेख से अच्छी होगी आम की फसल
कृषि
वैज्ञानिक डॉ. राजीव कुमार ने बताया कि जिले की जमीन व मानसून को देखते
हुए आम का ज्यादा उत्पादन होने की उम्मीद नहीं है। अमरूद, आंवला व बेर की
इस क्षेत्र में ज्यादा पैदावार है। हालांकि आम के पेड़ों में जल्दी बौर आने
से संकेत मिल रहे हैं कि यदि किसान इनकी सही देखरेख करे आम की पैदावार
अच्छी हो सकती है। कृषि वैज्ञानिक डॉ. खलील खान
ने बताया कि किसान बौर आने
के बाद पेड़ की रखवाली नहीं कर पाता। देखरेख के अभाव में बौर गुच्छे का रूप
बन जाती है। इससे उत्पादन में प्रभाव पड़ता है। किसानों को चाहिए कि वह
बौर पर दवाओं का छिड़काव करें। कृषि वैज्ञानिक ने भी माना कि मौसम में हो
रहे बदलावों के मद्देनजर मई व जून के महीने में खास ख्याल रखना होगा। इस
दौरान प्राकृतिक आपदा आने की आशंका भी है।
वर्जन
समय से कड़ाके
की सर्दी नहीं पड़ी। तापमान में ज्यादा गिरावट नहीं हुई। इस कारण आम के
पेड़ों में पहले से ही बौर आ गया। इससे स्पष्ट है कि आम की फसल जिले में
बेहतर होगी। इसके लिए यह भी जरूरी है कि फरवरी में सर्दी न पलटे। कहीं
कोहरा व तेज बारिश हो गई तो आम की फसल खराब हो सकती है।- लक्ष्मीकांत
अवस्थी, उद्यान निरीक्षक