उरई। रबी की फसल की बुआई में पलेवा के लिए परेशान हो रहे किसानों के लिए अच्छी खबर है। अब उन्हें पलेवा में सिंचाई के लिए पैसे खर्च करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। किसानों की मांग को देखते हुए जिलाधिकारी ने नगर विभाग के अधिकारियों को 20 अक्तूबर से नहरें चलाने के निर्देश दिए हैं। निर्देश मिलते ही नहर विभाग के अधिकारियों ने नहरों के संचालन के लिए सभी तैयारियों पूर्ण कर ली हैं।
बता दें कि इस समय रबी की बुआई का सीजन शुरू हो गया है। विभागों के साथ साथ किसानों ने रबी की फसलों की बुआई के लिए तैयारी तेज कर दी है। रबी की बुआई को लेकर जहां कृषि विभाग ने बीज व खाद की पर्याप्त उपलब्धता कर ली है वहीं किसानों ने पलेवा की तैयारी शुरू कर दी है, लेकिन जिले में सिंचाई के पर्याप्त संसाधन न होने की वजह से किसानों को पलेवा के लिए परेशान होना पड़ रहा था।
कई बार किसान नहरों के संचालन के साथ जिले में खराब पड़े नलकूप को ठीक कराने की मांग कर चुके हैं। अभी हाल ही में आयोजित हुए किसान मेले में भी किसानों ने नहर के संचालन की मांग उठाई थी। किसानों की परेशानी को देखते हुए जिलाधिकारी डा. मन्नान अख्तर ने नहर विभाग के अधिकारियों को जल्द नहरों के संचालन के निर्देश दिए थे, निर्देश मिलते ही नहर विभाग 20 अक्तूबर से नहरों का संचालन करने जा रहा है। नहर विभाग खंड प्रथम के अधिशाषी अभियंता जीबी पांडेय ने बताया कि नहरों का संचालन 20 अक्तूबर से जनवरी तक किया जाएगा। इसके बाद मांग के हिसाब से संचालन को बढ़ाया जाएगा।
अगर नहरों में छोड़ा गया पानी तो होगी राहत
उरई/जालौन। माधौगढ़ तहसील के कुठौंदा व रेंढर गांव के शिवकांत पाठक, गोविंद सिंह, श्यामशरण, ओमजी, रामकुमार कटारे, राहुल आदि ग्रामीणों ने उन्होंने अपने खेतों में जुताई बखराई कर ली है लेकिन अब तक नहरों में पानी नहीं छोड़ा गया है। जिससे बुआई में विलंब होने की संभावना है। लेकिन अगर 20 अक्तूबर से नहरों का संचालन शुरू हो गया तो राहत मिलेगी।
जालौन प्रतिनिधि के मुताबिक, क्षेत्रीय किसान अनस खा, डॉ.सीपी सिंह, शिवकुमार, रामजीराम चौधरी आदि ने बताया कि अक्तूबर माह में एक पखवारा भी नहीं बचा है। अभी तक नहरों में पानी नहीं छोड़ा गया है। किसानों को बड़े किसानों से रुपये देकर ट्यूबवेल से पानी लेने को मजबूर होना पड़ रहा है, डीएम के कहने पर अगर पानी मिलने लगा तो राहत हो जाएगी। किसान रविशंकर प्रजापति, हरी सिंह, परमेश्वरी दयाल, अरविंद कुमार आदि किसान कहते हैं कि इस बार अधिकांश क्षेत्र में किसानों ने तिली की फसल की बुवाई की थी लेकिन अधिक वर्षा होने के कारण उनकी फसल खराब हो गई। जिसके कारण किसानों पर दोहरी मार पड़ गई। एक तो उनकी फसल चौपट हो गई दूसरे उनके खेत भी खराब हो गए।