उरई। उद्योग व्यापार संगठन और बुंदेलखंड गल्ला व्यापार संघ के आह्वान पर मंडी शुल्क के विरोध में गल्ला मंडियों में तीन दिवसीय हड़ताल शुरू हो गई। इस दौरान व्यापारियों ने अपने हक को लेकर नारेबाजी की। बुंदेलखंड गल्ला व्यापार संगठन के अध्यक्ष प्रदीप माहेश्वरी ने दावा किया कि हड़ताल के कारण करीब 15 करोड़ का कारोबार प्रभावित हुआ है।
बुंदेलखंड गल्ला व्यापार संघ प्रदीप माहेश्वरी ने कहा कि केंद्र सरकार ने मंडी परिषद के बाहर मंडी शुल्क पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। मंडी के बाहर किसी भी तरह के लाइसेंस की जरूरत नहीं है लेकिन प्रदेश सरकार की ओर से मंडी के अंदर अभी भी ढाई प्रतिशत शुल्क की वसूली की जा रही है। इससे मंडियां बंद होने की कगार पर है। ऐसे हजारों व्यापारी बेरोजगार हो जाएंगे और हजारों लोग रोजगार विहीन हो जाएंगे। मंडी बचाने के लिए व्यापारियों ने गुरुवार से तीन दिवसीय हड़ताल शुरू कर दी है। इस दौरान महावीर गुप्ता, अरविंद चिकासी, केदार भारद्वाज, मनोज गुप्ता कालपी, रविंद्र राजपूत, देवीदीन राजपूत, आशीष, संतोष, जयराम, हरीसिंह, अनूप लिखौटिया आदि गल्ला व्यापारी मौजूद रहे।
पहले दिन गल्ला व्यापारियों ने की हड़ताल
कालपी। प्रदेश कमेटी के निर्देश के तहत गल्ला व्यापारियों की तीन दिवसीय हड़ताल गुरुवार से शुरू हो गई। गल्ला मंडी परिसर की दुकानों में ताले लटके रहे व व्यापारियों के साथ ही पल्लेदारों ने भी कार्य नहीं किया।
गुरुवार को व्यापारियों ने शासन के नए नियमों का विरोध करते हुए चेतावनी दी, कि जब तक नियम वापस नहीं लिए जाएंगे तब तक चरणबद्ध तरीके से आंदोलन चलता रहेगा। गल्ला व्यापारी मंडल के अध्यक्ष गौतम सिंह, शिशु, रूप सिंह मुखिया, राजेश पोरवाल, ब्रह्मेेश द्विवेदी, रामप्रकाश पुरवार, लल्लू पुरवार आदि ने कहा कि प्रदेश सरकार मनमाने ढंग से गल्ला व्यापारियों पर टैक्स की व्यवस्था थोप रही है। इस व्यवस्था से गल्ला व्यापारियों को कठिनाईयों का सामना करना पड़ेगा तथा तमाम प्रकार की समस्याएं उत्पन्न होंगी, इसलिए व्यापारियों को आंदोलन की राह पकड़नी पड़ रही है।