रुक्मणि विवाह में श्रीकृष्ण की झांकी।
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उरई। बांके बिहारी जनकल्याण समिति की ओर से आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के आठवें दिन भक्तों को रुक्मिणी विवाह की झांकी दिखाई गई। झांकी ने सभी का मन मोह लिया। कथावाचक पुरुषोत्तम शरण शास्त्री ने कहा कि इस संसार में जो व्यक्ति जैसा कर्म करता है उसको उसी के अनुरूप इसी जिंदगी में फल मिलता है।
उन्होंने कहा कि हमारे सभी धर्मग्रंथ, वेद पुराण, रामायण अच्छे कर्म करने की शिक्षा देते हैं। हमारा देश प्राचीन काल से ही विश्व गुरु रहा है। यहां की संस्कृति सर्वश्रेष्ठ है। भगवान ने यहां कई बार अवतार लिया है। उन्होंने श्रीकृष्ण की माखन चोरी की लीला का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान मित्रों के साथ टोली बनाकर गोपियों का माखन चुराया करते थे। फिर उसको सभी सखा मिलकर खाते थे। विशेषता यह थी कि जिससे यहां से माखन चोरी किया जाता था। उसी के आंगन में बैठकर खाते थे। इसके बाद रुक्मिणी विवाह की झांकी ने सभी का मन मोह लिया। उधर, जिला कारागार में अखंड रामायण पाठ का आयोजन किया गया। इसमें जेल स्टाफ ने सहयोग किया।