बेकाबू ट्रक ने तो तीन जिंदगियों को लील लीं लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने भी लापरवाही में कोई कसर नहीं रखी। घायलों के इलाज से लेकर शवों के पोस्टमार्टम तक में लापरवाही का आरोप लगाकर हंगामा हुआ। परिजनों की पोस्टमार्टम हाउस में डॉक्टरों से झड़प भी हुई। परिजनों का कहना है कि वे लापरवाही की शिकायत जिलाधिकारी से करेंगे।
परिजनों की मानें तो लापरवाही घटनास्थल से ही देखने को मिली। काफी देर बाद घायलों को अस्पताल भेजा गया। जिला अस्पताल में पिता-पुत्री की मौत के बाद भी घायल धर्मेंद्र को लेकर किसी डॉक्टर अथवा कर्मी ने गंभीरता नहीं दिखाई। पुलिस भी मूकदर्शक बनी खड़ी रही। काफी देर बाद धर्मेंद्र को ग्वालियर रेफर किया गया लेकिन झांसी पहुंचने से पहले ही उसकी सांसे थम चुकीं थीं।
इसके बाद तीनों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए मेडिकल कॉलेज परिसर लाया गया। जहां करसना गांव के लोगों की भी भीड़ एकत्र थी। शाम छह बजे तक जब शवों को छुआ नहीं गया तो परिजनों ने डॉक्टरों से संपर्क किया तो पता चला कि पुलिस ने अभी तीनों के कागज ही नहीं भेजे हैं। इस कारण मंगलवार को पोस्टमार्टम होना मुश्किल है। इस पर परिजन भड़क गए और डॉक्टरों से ही भिड़ गए।
परिजनों के मुताबिक वे मामले की शिकायत सीधे डीएम से करेंगे। इस संदर्भ में कोतवाल देवेंद्र द्विवेदी का कहना है कि शवों के कागज तो तैयार हो गए हैं लेकिन कुछ लिखा-पढ़ी बाकी है। उसे भी तत्काल कराकर पोस्टमार्टम कराया जा रहा है।
बाइक बता रही हादसे की भयावहता
घायलों के हाईवे से हटने के बाद जिसने भी वहां पड़ी धर्मेंद्र की बाइक देखी उसके मुंह से यही निकला कि उस पर बैठे लोगों का बचना मुश्किल ही है। बाइक पर से ट्रक के पहिये गुजरने के कारण वह पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई थी।
एक ओर चल रहा हाईवे पर काम
उरई से झांसी की ओर जाने वाले हाईवे पर बड़ागांव के पास कुछ दिनों से सड़क निर्माण का काम चल रहा है। इस कारण दूसरी साइड से ही दोनों ओर का यातायात चल रहा है। इसी कारण झांसी की ओर से आ रहे तेज रफ्तार ट्रक ने धर्मेंद्र की बाइक को अपनी चपेट में ले लिया।
अब कौन बनेगा बच्चों का सहारा
नेतराम के घर पर उसकी बदहवास पत्नी मालती अपने तीनों बच्चों दीपेंद्र (12), दीप्तिी (8) और गुड़िया (6) को सीने से लगाकर चीख रही थी कि इन बच्चों ने किसी का क्या बिगाड़ा था, अब कौन इनका सहारा बनेगा। दीक्षा शहीद चंद्रशेखर स्कूल में कक्षा दो की छात्रा थी।
मिसाल बन गई पड़ोसी की इंसानियत
हादसे के बाद करसान गांव में धर्मेंद्र की इंसानियत के ही चर्चे थे। ग्रामीणों का कहना है कि पड़ोसियों के बीच विवाद तो कई देखे हैं लेकिन किसी पड़ोसी की मदद करते हुए जान गंवाने वाले कम ही होते हैं। परिजनों के मुताबिक धर्मेंद्र की तीन बहनें और एक बड़ा भाई पुष्पेंद्र है। धर्मेंद्र, नेतराम व उसकी बेटी के लिए रिश्तेदार दीपक की बाइक लेकर वैद्य के पास ले जा रहा था। परिजनों ने बताया कि धर्मेंद्र की शादी की भी बात चल रही थी।