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बाढ़ ने छीना दाना-पानी, मदद ही बनी सहारा

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लोहई गांव में स्वास्थ्य विभाग की टीम ग्रामीणों को दवा देती हुई। - फोटो : ORAI
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रामपुरा/कुठौंद/महेबा। बाढ़ का पानी भले ही कम हुआ हो, पर लोगों की मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। बाढ़ प्रभावित ग्रामीण इलाकों में लोगों के घरों में खाने पीने का कुछ सामान भी नहीं बचा है, इसके साथ ही बिजली पानी की व्यवस्था भी ठप है। ऐसे में प्रशासन व समाजसेवियों से मिलने वाली मदद ही पीड़ितों का सहारा बनी हुई है।
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महेबा के बाढ़ पीड़ित इलाकों में लोकतंत्र रक्षक सेनानी लाल सिंह चौहान ने ग्राम गुढ़ाखास में राहत सामग्री वितरित की। किसी को लालटेन, किसी को राशन और किसी को कपड़े देकर हर संभव मदद का भरोसा दिलाया। गांव के सुखदेव का कहना है कि घर पर खाने को कुछ नहीं बचा है। समझ में नहीं आता आगे कैसे गुजारा होगा। वहीं रामपुरा में भी प्रशासन के साथ साथ समाजसेवियों ने भी बाढ़ पीड़ितों की मदद को हाथ आगे बढ़ाए। कुसेपुरा गांव में जंगबहादुर, मनीष कुमार, चिंतामन, विनय हरौली, कुमकुम डिकौली, मानसिंह आदि ने राहत सामग्री वितरित की।
कुसेपुरा के रामाधीन और बिलौड़ की महिला कुंती का कहना है कि कोई कितने दिन खिला देगा, भगवान ही जाने आगे क्या होगा। कब जिंदगी ढर्रे पर लौटेगी कोई नहीं जानता है। कुठौंद क्षेत्र के लोहाई गांव में लोगों का सब कुछ बाढ़ के पानी ने छीन लिया। लोग एक-एक रोटी के लिए परेशान हैं। ग्राम प्रधान लोहाई की ओर से सभी पीड़ितों को स्कूल में बैठाकर भोजन कराया जा रहा है। वहीं प्रशासन की स्वास्थ्य विभाग की टीमें मरीजों का इलाज करने में जुटी हैं।

लोहई गांव में बाढ़ पीड़ितों को स्कूल में भोजन कराते प्रधान- फोटो : ORAI

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