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दूसरे दिन भी घटा यमुना का जल स्तर, बेतवा में मामूली बढ़त

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कालपी मे यमुना का उतरता जलस्तर - फोटो : ORAI
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उरई/कालपी। यमुना के बाद शुक्रवार शाम माताटीला बांध से बेतवा में करीब डेढ़ लाख क्यूसेक पानी यमुना में छोड़ा गया है। जिससे रात में एक बार फिर यमुना का जल स्तर बढ़ने लगा था, जिससे बेतवा पट्टी के गांवों में दहशत का माहौल हो गया था, लेकिन गनीमत रही की सुबह होते ही यह बढ़त बंद हुई और दोपहर तक जल स्तर में काफी गिरावट दर्ज की गई। जिससे सभी ने राहत की सांस ली।
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बता दें कि शुक्रवार शाम माताटीला बांध से बेतवा में करीब डेढ़ लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने से बेतवा रात में डेढ़ मीटर तक बढ़ने के बाद सुबह एक बार फिर घटने लगी। शुक्रवार व शनिवार के शाम चार बजे तक के आंकड़ों के अनुसार बेतवा शुक्रवार को 114 मीटर पर थी, जो शनिवार को 114.88 मीटर पहुंच गई। दोनों दिन की तुलना में बेतवा में 0.88 मीटर की बढ़त हुई है। रात में बेतवा का जल स्तर 114 मीटर से बढ़कर 115.35 मीटर तक पहुंच गया था, जबकि खतरे का निशान 122.64 मीटर पर है। जिससे ग्रामीणों को बाढ़ का भय सताने लगा था।
वहीं इस बढ़त से प्रशासन भी सजग हो गया है और सूचना मिलते ही रात में एडीएम प्रमिल कुमार सिंह ने बेतवा पट्टी में बनी बाढ़ चौकियों को अलर्ट पर रखने के निर्देश देकर चेतावनी जारी भी कर दी, लेकिन शनिवार सुबह राहत बन कर आई। भीषण बाढ़ के बाद यमुना का जल स्तर दूसरे दिन भी घटा। जिससे नदी पट्टी के गांवों के लोगों को राहत मिली। आंकड़ों के अनुसार शुक्रवार को यमुना का जल स्तर 111.95 में पहुंच गया था, जो 2 मीटर घटकर 109.95 मीटर रह गया है। एसडीएम विकास कश्यप ने बताया कि शनिवार को बेतवा में मामूली बढ़त हुई है, जिससे फिलहाल खतरे की कोई बात नहीं है। फिर भी सभी को अलर्ट पर रखा गया है।
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पांच दिन पूर्व खतरे के निशान से चार मीटर ऊपर बह रही यमुना ने तलहटी के गांवों में भारी तबाही मचाई थी। लगातार बढ़ते जलस्तर को देखते हुए जिले में बाढ़ को लेकर हाहाकार मचा था, लेकिन शुक्रवार से कम हुआ यमुना का जल स्तर शनिवार को भी घटता नजर आया। जिससे सभी को जल्द हालात सामान्य होने की उम्मीद जागी है। जल आयोग की रिपोर्ट के अनुसार शनिवार को यमुना का जल स्तर 111.95 से घटकर 109.95 मीटर पर पहुंच गया।
एडीएम भैरपाल सिंह ने बताया कि जल्द ही जल स्तर खतरे के निशान के नीचे पहुंच जाएगा। जिससे बाढ़ प्रभावित गांवों में हालात सामान्य हो जाएंगे। सभी गांवों में स्वास्थ्य टीमों को भेजा जा रहा है। उधर, जिलाधिकारी ने भी पचनद व कालपी के कई गांवों का भ्रमण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया और अधिकारियों को बचाव राहत कार्यों को तेज करने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पानी कम होने से शिथिलता न लाएं, बल्कि और मेहनत करें। पानी उतरने के बाद संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ता है, इसलिए नियमित निरीक्षण कर गांव-गांव दवाएं और राहत सामग्री पहुंचाएं।
इन गांवों में अभी भी भरा है पानी
भले ही बाढ़ का कहर जिले में कम हुआ हो पर अभी भी कालपी क्षेत्र के मदारपुर, देवकली, रायड़, जकसिया, सुरौली, सुरौला, गुलौली, मवई, सोंधी, जकसिया, मदरालालपुर, पाली, हीरापुर, देवकली, अभिर्वा, जमरेही, मैनुपुर, पड़री, मगरौल, नरहान, धर्मपुर, गुढ़ा खास, शेखपुर गुढ़ा, पिपरौंधा, भदेख, महेबा आदि गांवों में बाढ़ का पानी भरा है, जिससे इन गांवों में अभी भी हालात सामान्य होते नहीं दिख रहे है।
जल्द नुकसान का सर्वे करने के निर्देश
एडीएम प्रमिल कुमार सिंह नेे अधिकारियों को निर्देश दिए है कि जल्द से जल्द बाढ़ प्रभावित गांवों में फसल के नुकसान का सर्वे पूरा कर लें, जिससे किसानों को मुआवजा दिलाया जा सके। इसके साथ ही उन्होंने सभी स्वास्थ्य अधिकारियों को निर्देश दिए कि वह गांव में नियमित सर्वे कर दवा वितरण करें। इसके साथ ही गांव में साफ-सफाई के निर्देश दिए। सभी नामित नोडल अफसरों को नियमित गांवों के निरीक्षण कर रिपोर्ट देने को कहा। चेतावनी दी कि अगर किसी भी गांव में संक्रामक रोगों के फैलने की सूचना मिली तो जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

रामपुरा क्षेत्र के बैरागुढा बाढ़ क्षेत्र का निरीक्षण करते डीएम मन्नान अख्तर व एसपी सतीश कुमार- फोटो : ORAI

बाढ़ का पानी उतरने के बाद रास्ते में मिट्टी डालते मजदूर- फोटो : ORAI

रायड दिवारा में बाढ़ की स्थिति देखती टीम- फोटो : ORAI

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