गल्ला मंडी स्थित ट्रैक्टर में लदा गेहूं।
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गेहूं खरीद के तीसरे दिन भी सरकारी क्रय केंद्रों का सन्नाटा नहीं टूटा। क्रय केंद्रों के तमाम झंझटों से बचने के लिए किसान आढ़तियों को गेहूूं बेच रहे हैं। किसानों का कहना है कि क्रय केंद्रों में भुगतान में देरी होती है, जबकि आढ़ती नगद भुगतान करते हैं। इसके अलावा क्रय केंद्रों पर तमाम दुश्वारियां होती हैं।
कहने को तो जिले के सरकारी क्रय केंद्रों पर एक अप्रैल से गेहूं की खरीद शुरू हो गई, लेकिन अभी तक किसी भी केंद्र में गेहूं नहीं खरीदा जा सका। शासन की ओर से 1625 रुपये समर्थन मूल्य तय किया है, लेकिन तमाम किसान क्रय केंद्र आने की बजाय 1425 से 1450 रुपये क्विंटल गेहूं आढ़तियों को बेच रहे हैं। किसानों का कहना है कि सरकारी क्रय केंद्रों पर भाव भले ही ज्यादा हो, लेकिन वहां इतनी दुश्वारियां हैं कि वे आढ़तियों को ही गेहूं बेचना मुनासिब समझते हैं।
इसी तरह पल्लेदार भी काम के बदले निर्धारित मूल्य न मिलने से परेशान हैं। प्रशासन का कहना है कि सरकारी केंद्रोें मेें तैयारियां पूरी हैं, लेकिन नगद भुगतान के चक्कर में किसान आढ़तियों के पास जा रहा है। अभी शुरुआत हैं। चार-छह दिन में सरकारी केेंद्रों में भी किसानों की भीड़ दिखने लगी। जिले में इस बार 69 सरकारी क्रय केंद्र खोले गए हैं। एक अप्रैल से यहां गेहूं की खरीद की जानी थी। सप्ताह भर पहले डीएम ने बैठक कर केंद्रों पर व्यवस्थाएं दुरुस्त रखने के निर्देश दिए थे, पर शासन से अभी खरीद का लक्ष्य नहीं मिला है। इसके अलावा कई केंद्रों पर तैयारियां भी आधी अधूरी हैं।
हाथ पर हाथ धरे बैठे केंद्र प्रभारी
उरई स्थित गल्ला मंडी में मेज कुर्सी डालकर बैठे केंद्र प्रभारी भरत किशोर, गजेंद्र बाथम, सुभाष चंद्र का कहना है कि अभी तक उनकी ही आईडी नहीं बनी है। इस वजह से किसानों का गेहूं नहीं खरीद पा रहे हैं। मंडी आने वाले किसान या तो लौट जाते हैं या फिर आढ़तियों के हाथ गेहूं बेच देते हैं।