उरई। ऊर्जा भवन के बाहर गुरुवार को निजीकरण के खिलाफ गुरुवार को सौ से अधिक बिजली कर्मचारियों ने एकजुट होकर प्रदर्शन। कर्मचारियों ने जमकर नारेबाजी की।
गुरुवार की सुबह करीब 10 बजे से शाम 5 बजे तक बिजली कर्मचारियों ने कार्यालय बंद रखकर विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के बैनर तले विरोध प्रदर्शन किया। इसमें जूनियर इंजीनियर ने पहले विद्युत व्यवस्था की समीक्षा की और लाइनमैन को फाल्ट और अन्य तकनीकी समस्याओं के समाधान के लिए तैनात किया। इसके बाद वह भी विरोध में शामिल हो गए।
कर्मचारियों का कहा है कि सरकार निजीकरण की ओर बढ़ते कदमों से उनकी अनदेखी कर रही है। इससे उपभोक्ताओं और कर्मचारियों को भारी नुकसान होगा। निजीकरण से आम जनता को बिजली से वंचित रहना पड़ सकता है। जेई जगदीश वर्मा ने कहा कि सरकार निजीकरण के माध्यम से प्रबंध तंत्र को फायदा पहुंचाना चाहती है। विद्युत विभाग पर मालिकाना हक जनता का है। देवेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि पावर कॉरपोरेशन के चेयरमैन और पूर्वांचल व दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण को लेकर इतना उतावलापन है कि वह संविधान के अनुच्छेद 311(2) का उल्लंघन करते हुए कर्मचारियों की बर्खास्तगी जैसे असंवैधानिक आदेश जारी कर रहे हैं। इस तरह का कार्य उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों का भी अपमान है।
जेई गौरव कुमार ने कहा कि बिजली कर्मचारियों के शांतिपूर्ण आंदोलन से प्रबंधतंत्र बौखला गया है और इस भीषण गर्मी में औद्योगिक अशांति का माहौल बनाकर जबरन हड़ताल थोपने की कोशिश कर रहा है। प्रदर्शन में अधिशासी अभियंता महेंद्र नाथ भारती, एसडीओ कुठौंद सुनील कुमार, एसडीओ जालौन रामसुधार, परमात्मा शरण, आलोक खरे मौजूद रहे।