लखनऊ में सपा कार्यालय में पूर्व सीएम अखिलेश यादव के साथ पूर्व विधायक विनोद चतुर्वेदी
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विधानसभा चुनाव 2022 जैसे-जैसे नजदीक आ रहा हैं दलों के सियासी समीकरण भी तेजी से बदलते दिखाई दे रहे हैं। टिकटों की घोषणा से पहले ही गैर भाजपा दलों में नेताओं के पाला बदलने का सिलसिला शुरू हो गया। जिले में इसकी शुरुआत कांग्रेस के पूर्व विधायक विनोद चतुर्वेदी ने की है। वह बेटे आशू के साथ शुक्रवार को पूर्व सीएम अखिलेश यादव के समक्ष समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए।
आशू भी 2017 में कांग्रेस के टिकट पर उरई से पालिका का चुनाव लड़े थे। फिलहाल पूर्व विधायक के कालपी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की अटकलें भी तेज हो गई हैं। बता दें कि विनोद चतुर्वेदी शुरू से ही कांग्रेस का झंडा हाथ में लेकर चलने वाले पार्टी दिग्गज नेताओं में गिने जाते थे। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ही नहीं बल्कि सोनिया, राहुल और प्रियंका के भी भरोसे मंदों में शामिल रहे हैं।
बीते कुछ महीनों से वे जरूर कांग्रेस से नाराज से दिखाई दे रहे थे। जिसका परिणाम शुक्रवार को सामने आ गया। जिलाध्यक्ष से लेकर वर्ष 2007 में सदर सीट से विधायक और फिर कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष पद पर काम कर चुके विनोद ने आखिरकार साइकिल पर सवार होना तय किया। सोशल मीडिया पर शुक्रवार को पूरे दिन पूर्व विधायक विनोद की पूर्व सीएम अखिलेश के साथ फोटो और खबरें सुर्खियां बटोरती रही।
सूत्रों के अनुसार साइकिल के सहारे वे कालपी विधानसभा चुनाव में जीत का सफर तय करना चाहते हैं। फिलहाल विनोद चतुर्वेदी के पाला बदलने से जनपद की कम से कम कालपी सीट के समीकरण दूसरे दलों के लिए भी बनते बिगड़ते दिखाई दे रहे हैं। जल्द ही सपा और बसपा के कुछ नेता भी दूसरे दलों का दामन थाम सकते हैं।
विनोद बोले- पार्टी समझ रही थी बोझ
देर शाम पूर्व विधायक विनोद चतुर्वेदी ने फोन पर कांग्रेस छोड़ने का कारण बताते हुए कहा कि उन्हें कांग्रेस उचित सम्मान नहीं दे रही थी। बल्कि उल्टे बोझ समझने लगी थी। इसलिए उन्होंने पार्टी का सही समय समझा और कांग्रेस छोड़कर सपा में शामिल हो गए। 2022 में सपा को भारी बहुमत से जिताने का पूरा प्रयास करेंगे। रही बात उनके स्वयं के चुनाव लड़ने की तो इसका फैसला सपा हाईकमान करेगा। इस पर वे फिलहाल कुछ नहीं कह सकते।