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रेहाना के जीवन का मकसद, अनाथ बच्चों की बेहतर शिक्षा-परवरिश

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उरई। कहते हैं कि जिसने खुद दर्द और संघर्ष का सामना किया हो, वहीं दूसरों के इस अहसास को समझ सकता है। कालपी तहसील के ब्लॉक महेवा के बीजापुर गांव निवासी रेहाना मंसूरी (35) ने अनाथ बच्चों के दर्द को महसूस किया और उनके लिए जीवन समर्पित करने की ठान ली। आज वह 15 अनाथ बच्चों की अभिभावक बनकर न केवल बेहतर परवरिश, बल्कि उन्हें शिक्षा भी दिला रही हैं।
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12वीं की पढ़ाई के दौरान रेहाना के पिता और दो साल बाद मां का इंतकाल हो गया। कठिन समय में उन्होंने संघर्षों से अपनी पढ़ाई पूरी की। इसी दौरान बल्कि अनाथ और अभाव में जीने वाले बच्चों की मदद का संकल्प भी ले लिया।
रेहाना ने दो बार स्नातक और दो बार बीएड की डिग्री ली। उसके बाद जीएनएम का कोर्स किया। उनका चयन पुलिस में भी हो गया था। मन में कुछ अलग करने की ललक थी। इसलिए पुलिस की नौकरी की बजाय सामाजिक संगठनों से जुड़ गईं। रिहाना ने तय किया कि वह किसी भी हाल में अनाथ और अभावग्रस्त बच्चों को गोद लेकर, उन्हें शिक्षित और आत्मनिर्भर बनाने के लिए हरसंभव प्रयास करेंगी। उन्होंने शादी भी नहीं की।
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उन्हें जानकारी मिली कि ग्राम सरावन में आसिफ अली और शबनम की मृत्यु हो गई है। उनकी चार छोटी बेटियां सिमरन, इकरा, आलिया और आरुषि की पढ़ाई का कोई प्रबंध नहीं है। रिहाना ने उन चारों बच्चियों को गोद ले लिया। इसी तरह सैदपुर निवासी संस्कार और विवेक के माता-पिता वाल्मीकि और पूजा की मौत हो गई है। दोनों बच्चों को रिहाना ने गोद ले लिया। इन सभी छह बच्चों का स्कूलों में दाखिला कराया। वह इन बच्चों का खुद पूरा ख्याल रख रही हैं। उन्होंने संस्कार विवेक और सिमरन का प्रवेश आवासीय विद्यालय बबीना में करा दिया है। बताया कि इसी क्षेत्र के अन्य गांवों के सात बच्चे और हैं, जिन्हें गोद लिया है। वह वर्तमान में 15 बच्चों की परवरिश और पढ़ाई की जिम्मेदारी उठा रही हैं। रेहाना का कहना है कि उनके जीवन का एक ही लक्ष्य है, अधिक से अधिक अनाथ-अभावग्रस्त बच्चों का जीवन संवारना। उन्हें शिक्षित और आत्मनिर्भर बनाना।
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