आए दिन सड़क हादसों ने आखिरकार पुलिस महकमे की आंखें खोल दी हैं। हादसों को
रोकने के लिए महकमे के अधिकारी योजना तैयार करने में जुटे हैं। इसमें
हेलमेट न लगाने पर ड्राइविंग लाइसेंस निरस्त करने का नियम बनाने पर गंभीरता
से विचार हो रहा है। साथ ही आने वाले समय में समाजसेवी संगठनों के साथ
मिलकर लोगों को वाहन चलाते वक्त हेलमेट लगाने के लिए जागरूक करने की योजना
भी बनाई जा रही है।
सड़क हादसों में जान गंवाने वालों की संख्या हर साल
बढ़ती जा रही है। जिले में आए दिन होने वाले सड़क हादसों में प्राय: यह
देखने को मिलता है कि हादसे के समय चालक यातायात नियमों का पालन नहीं कर
रहा था। कई हादसों में तो सिर में गंभीर चोटें आने से लोग जान गंवा बैठते
हैं। देखा गया है कि अगर वह हेलमेट लगाए होते तो शायद उनके सिर में इतनी
गंभीर चोटें न आतीं और उनकी जान भी बच सकती थी। शहर में बढ़ रहे सड़क
हादसों को लेकर पुलिस महकमे के अधिकारी गंभीर हो गए हैं। एसपी एन कोलांची,
सीओ ट्रैफिक जंगबहादुर सिंह के साथ मिलकर हादसों में कमी लाने के लिए योजना
तैयार कर रहे हैं। इसके तहत जल्द ही बिना हेलमेट के बाइक चलाने वालों के
खिलाफ कार्रवाई भी शुरू कर दी
जाएगी। इसमें बिना हेलमेट के बाइक चलाने वाले
चालकों का नाम, पता दर्ज कर एआरटीओ विभाग से उनके ड्राइविंग लाइसेंस
निरस्त कराए जाएंगे। लोगों को हेलमेट लगाकर बाइक चलाने के प्रति जागरूक
करने के लिए अभियान भी ट्रैफिक
पुलिस की ओर से चलाया जाएगा। सीओ ट्रैफिक
जंगबहादुर सिंह का कहना है कि समाजसेवी संगठनों से बात चल रही है। निकट
भविष्य में इन संगठनों के साथ मलिकर ट्रैफिक पुलिस जागरूकता अभियान चलाएगी।
इसमें बाइक चालकों को हेलमेट लगाने के फायदे बताते हुए उन्हें जागरूक किया
जाएगा।
हेलमेट लगाने के फायदे
सीओ ट्रैफिक जंगबहादुर
ने बताया कि हेलमेट लगाकर बाइक चलाने के कई फायदे होते हैं। इससे बाइक
चलाते वक्त दिमाग एकाग्र रहता है। आसपास से आने वाले शोर का ज्यादा प्रभाव
नहीं पड़ता और बिना किसी व्यवधान के हेलमेट लगाकर बाइक चला सकते हैं। इसके
साथ ही अगर कोई अनहोनी होती है तो सिर में गंभीर चोटें आने की आशंका काफी
कम रहती है। इससे वाहन चालकों की जान भी सुरक्षित रहती है। इसलिए हेलमेट
लगाकर ही बाइक चलाना चाहिए।
जिले में कम है हेलमेट की बिक्री
जागरूकता
के अभाव में जिले के अधिकांश वाहन चालक हेलमेट नहीं लगाते। यही कारण है कि
जिले में हेलमेट की बिक्री काफी कम है। एक अनुमान के मुताबिक पूरे जिले
में वर्ष भर में करीब दो से तीन हजार हेलमेट की ही बिक्री होती है। जबकि
दोपहिया वाहनों की संख्या दो लाख से ऊपर है। हेलमेट विक्रेता राजेश सिंह
कहते हैं कि बहुत ही कम लोग हेलमेट खरीदते हैं। रोज केवल चार या पांच
हेलमेट की बिक्री वह करते हैं।
हेलमेट के कारण बची जान
उरई कोतवाली क्षेत्र के ग्राम रिनियां निवासी रामकुमार भी अन्य लोगों की
तरह हेलमेट नहीं लगाते थे, लेकिन घर के लोगों के बार-बार कहने पर उन्होंने
हेलमेट लगाकर बाइक चलाना शुरू कर दिया। चार महीने पहले वह अपने गांव से उरई
आ रहे
थे। झांसी रोड पर सामने से आ रहे तेज रफ्तार बाइक चालक ने उन्हें
टक्कर मार दी थी, इसमें उन्हें पैर में चोट आई थी। हेलमेट लगे होने सिर में
चोट नहीं आई और वह बाल बाल बच गए। रामकुमार कहते हैं कि दुर्घटना के वक्त
वह जब सड़क पर गिर गए तो हेलमेट काफी डैमेज हो गया था लेकिन उनकी जान बच
गई।
वर्जन
हेलमेट के लिए जागरूकता अभियान चलाने के साथ ही
कार्रवाई भी अमल में लाई जाएगी। इसके लिए योजना तैयार की जा रही है। चुनाव
निपटने के बाद इस पर काम शुरू कर दिया जाएगा। अधिक से अधिक लोगों को हेलमेट
लगाकर जागरूक करना हमारी प्राथमिकता है, ताकि सड़क हादसों में लोगों को
जान न गंवानी पड़ें। - एन कोलांची, पुलिस अधीक्षक