फोटो - 36 बारिश के बाद हवा चलने से बिछी गेहूं की फसल। संवाद
उरई। मार्च माह में हो रही बेमौसम बारिश और तेज हवाओं ने जिले के किसानों की चिंता बढ़ा दी है। सोमवार रात फिर बूंदाबांदी हुई। इससे खेतों में खड़ी और कटी पड़ी फसलों पर नुकसान का खतरा मंडराने लगा है। गेहूं, सरसों, चना, मटर और मसूर जैसी प्रमुख रबी फसलें इससे प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
किसानों का कहना है कि वर्तमान स्थिति को देखते हुए अगर बारिश होती है, तो 30 से 40 प्रतिशत तक नुकसान की आशंका है। साथ ही खेतों में कटी फसल को बारिश से सबसे ज्यादा नुकसान होगा। क्योंकि फली पर पानी पड़ते ही वह फूट जाएगी और दाना बिखरने के बाद खेत में गिर जाएगा। जिले में इस समय करीब दो लाख हेक्टेयर में गेहूं, 80 हजार हेक्टेयर में मटर, 50 हजार हेक्टेयर में मसूर, 35 हजार हेक्टेयर में चना और लगभग 30 हजार हेक्टेयर में सरसों की खेती की गई है।
मौसम वैज्ञानिक विस्टर जोशी के अनुसार यह बारिश पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने के कारण हुई है। मौसम में उतार-चढ़ाव बना हुआ है और आगे भी हल्की बारिश या तेज हवा चलने की संभावना जताई जा रही है। किसानों को सलाह दी गई है कि कटी फसल को जल्द सुरक्षित स्थान पर रखें और खड़ी फसल की निगरानी करते रहें।
किसानों ने सरकार से मांग की है कि यदि नुकसान होता है तो समय रहते सर्वे कराकर उचित मुआवजा दिया जाए, ताकि वे आर्थिक रूप से संभल सकें। उनका कहना है कि फसल तैयार होने के समय मौसम की मार से उनकी मेहनत पर संकट खड़ा हो गया है।
वर्जन
जिन किसानों का नुकसान हुआ है, वह टोल फ्री नंबर पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं। साथ ही इसकी जांच भी चल रही है। ज्यादातर फसलों में नुकसान नहीं हुआ है।
एस के उत्तम, डीडी कृषि।