उरई। जिले में बरार (बसोर) समाज की संख्या को शून्य दर्शाए जाने का मामला अब संसद तक पहुंच गया है। जालौन-गरौठा-भोगनीपुर क्षेत्र के सांसद नारायणदास अहिरवार ने संसद में यह मुद्दा उठाते हुए इसे भ्रामक बताते हुए जांच की मांग की है। परियोजना निदेशक ने शासन को भेजी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि जिले में इस समाज के लोग नहीं हैं। सांसद का आरोप है कि इसी वजह से इस तबके को आवास योजना से वंचित किया गया है।
सोमवार को सांसद नारायण दास अहिरवार ने प्रश्नकाल के दौरान कहा कि परियोजना निदेशक अखिलेश तिवारी द्वारा शासन को भेजी गई रिपोर्ट में जिले में बसोर समाज की संख्या शून्य बताई गई है, जो पूरी तरह गलत है। उन्होंने इसे संबंधित समाज के प्रति असंवेदनशीलता करार दिया।
उन्होंने बताया कि जिले में बरार समाज के हजारों लोग रहते हैं। करीब 60 लोगों ने अपने शपथ पत्र और जाति प्रमाण पत्र संबंधित मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजे थे। इसके बावजूद उनके आवेदनों को नजरअंदाज कर दिया गया।
सांसद ने आरोप लगाया कि इस त्रुटिपूर्ण रिपोर्ट के कारण बड़ी संख्या में लोग मुख्यमंत्री आवास योजना के लाभ से वंचित रह गए हैं। खासतौर पर रामपुरा विकास खंड में इस समाज की मौजूदगी को पूरी तरह नकार दिया गया, जबकि वहां सैकड़ों परिवार रह रहे हैं।
वहीं, परियोजना निदेशक अखिलेश तिवारी का कहना है कि यह रिपोर्ट उन्हें जिले के नौ विकास खंडों में तैनात बीडीओ से मिली जानकारी के आधार पर तैयार की गई है। इसमें संबंधित समाज की उपस्थिति नहीं बताई गई थी।
सांसद ने सरकार से मांग की है कि मामले का भौतिक सत्यापन कराया जाए और पात्र लोगों को योजनाओं का लाभ दिलाया जाए, ताकि किसी भी वर्ग के साथ अन्याय न हो।
जिले में बसोर समाज की संख्या करीब अस्सी हजार
जनपद में बरार बसोर समाज की कुल संख्या करीब 80 हजार के आसपास है। वहीं, उरई विधानसभा क्षेत्र में ही लगभग 25 हजार लोग इस समाज से जुड़े बताए जाते हैं। खास बात यह है कि इस समाज के लोग कई स्थानों पर धानुक और कठेरिया नाम से भी जाने जाते हैं। इससे आंकड़ों में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सही सर्वे और पहचान न होने के कारण इस समाज के कई लोग सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित रह जाते हैं। ऐसे में वास्तविक आंकड़ों का सत्यापन कराना आवश्यक है, ताकि पात्र लोगों को योजनाओं का लाभ मिल सके।