आटा/सरावन/सिरसा/एट। दीपावली का त्योहार बीतने के बाद भी गांव कस्बों में साफ सफाई नजर नहीं आ रही है। कहीं सड़कों पर कूड़े के ढेर लगे हैं तो कहीं की गलियां कीचड़ से सनी हुई हैं। लोगों को स्वयं ही घरों के बाहर झाड़ू लगाकर सफाई करनी पड़ती है। इलाकाई लोगों का कहना है कि सफाई कर्मियों की लापरवाही कहे या मनमानी उन्हें तो गंदगी झेलनी ही पड़ रही है। अब न कोई अधिकारी निरीक्षण को आ रहा है न ही नेता ही सुध ले रहे हैं।
सरावन प्रतिनिधि के मुताबिक पूरे कस्बे की आबादी करीब 22 हजार है और इनके बीच में सिर्फ एक ही सफाई आता है। यही वजह है कि दौलतपुरा, वदनपुरा, खितौली, नरायणपुरा आदि गांवों में दीवाली पर भी गंदगी ही नजर आई। यही हाल माधौगढ़ तहसील के गांव गोहन, सहाव, भंगा बोहरा, रुपापुर, गोराभूपका, जैतपुरा, चाकी इकहरा में अभी भी गंदगी पसरी हुई है। कुछ एक सफाई कर्मियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उन्हें ब्लाक व जिला स्तर के अधिकारियों के घर पर भी ड्यूटी देने जाना पड़ता है। एट प्रतिनिधि के मुताबिक, क्षेत्र को भले ही नगर पंचायत का दर्जा मिल गया हो लेकिन सुविधाएं एक भी वैसी नहीं दिखती। 16 वार्डों के बीच करीब 35000 की आबादी है, लेकिन सफाई कर्मी गिने चुने ही दिखाई देते हैं। जो सफाई कर्मी आते भी है तो सिर्फ खानापूरी कर लौट जाते हैं। ऐसे में लोगों को अपने अपने दरवाजों पर स्वयं ही झाड़ू लगानी पड़ती है। यह बात और है कि एक जगह एकत्र होने वाला कूड़ा फिर से उड़कर उन्हीं के दरवाजों पर एकत्र हो जाता है।
आटा प्रतिनिधि के मुताबिक, कस्बे की लगभग 15 हजार आबादी के बीच दो महिला सफाई कर्मियों की ड्यूटी सफाई की व्यवस्था के लिए लगी हुई है। यह सफाई कर्मी भी कभी कदार ही नजर आती है। घरों से निकलने वाला पानी दरवाजे पर ही कीचड़ की शक्ल में एकत्र रहता है। यही हाल क्षेत्र के परासन का भी है। महीनों से सफाई न होने से नालियां बजबजा रही हैं। तहसील का सबसे बड़ा गांव है तो गंदगी भी सबसे अधिक परासन में ही देखने को मिलती है। जीतेंद्र सिंह, सुशील, उमाशंकर आदि का कहना है कि कई बार प्रधान से शिकायत भी की गई है। सिरसाकलार प्रतिनिधि के अनुसार, क्षेत्र के मघापुर में भी गंदगी का अंबार लगा हुआ है। घरों से निकलने वाला सारा कूड़ा कचरा नालियों में जाने से नालियां भी चोंक पड़ी है। इस संदर्भ में एडीएम प्रमिल कुमार का कहना है कि जल्द ही बैठक कर अधिकारियों को निर्देश दिए जाएंगे, ताकि गांव कस्बों में साफ सफाई की व्यवस्था दुरुस्त हो सके।