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बेटी और भाइयों की मौत से बदहवास है अलका

Sat, 15 Jun 2019 12:30 AM IST
प्रशांत कुमार अमर उजाला ब्यूूराे जालाैन
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भाइयों और बेटी की मौत पर रोती अलका।  - फोटो : amar ujala
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 अस्पताल में बदहवास अलका कभी भाइयों का नाम लेकर दीवार पर सिर पटकती तो कभी बेटी आरोही का शव देख अपने की हाथों से अपनी छाती पीट रही थी। उसकी हालत देख अस्पताल की महिला कर्मियों की भी आंख नम हो गईं। अस्पताल में अर्द्धबेहोशी की हालत में दूल्हे की मां गायत्री बार-बार अपने दोनों बेटों दीपू और सीपू का नाम पुकार रही थी, उसे दर्दनाक हादसा तो याद था लेकिन यह नहीं पता था कि इस हादसे ने उसके घर के दोनों ही चिराग हमेशा के लिए बुझा दिए। कालपी से आई महिलाएं आपस में कह रही थी कि जिस बेटे के सिर पर शादी के वक्त सेहरा देखने की खुशी अभी पूरी भी नहीं हुई थी, उसकी अर्थी पर सामने आएगी तो ममता का कलेजा ही फट जाएगा।

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हादसे के तुरंत बाद मुहम्मदाबाद के ग्रामीणों की जांबाजी भी देखने लायक थी। उन्होंने अपनी परवाह किए बगैर क्षतिग्रस्त वैन को कभी हाथों से तो कभी लोहे की रॉड व साबड़ से काटना शुरू किया, जिसे जहां से भी लगा कि भीतर से लोगों को निकाला जा सकता था, उसने वहीं से हाथों से वैन की चादर उखाड़नी शुरू कर दी। यदि ग्रामीण इतनी तत्परता न दिखाते तो हादसे में और भी जानें जा सकती थीं। वहीं पुलिस ने कम मेहनत नहीं की, घायलों को अपनी जीप में बैठाने के कारण थानेदार व सिपाहियों की वर्दी भी लाल हो गई थी।  जिस वक्त हादसा हुआ, उस वक्त ग्रामीणों का आक्रोश भी चरम पर था। ग्रामीण डंपर को फूंकने के प्रयास में थे, ऐसे में पुलिस के लिए वहां से शवों को हटाना भी चुनौती थी। इसी बीच पुलिस ने गांव के कुछ प्रभावशाली लोगों से बात की और फिर आनन फानन में ट्रैक्टर पर ही दूल्हे दीपू समेत सभी के शव लादकर उन्हें जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने देखते ही सभी शवों को मोर्चरी के लिए भेज दिया।

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