्योतिर्विद पं. संजय रावत शास्त्री
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उरई। रंगों के पावन पर्व पर होलिका दहन को लेकर इस बार संशय की स्थिति है। जबकि रंग खेलने के दिन 18 मार्च यानी शुक्रवार पर विद्वानों का एकमत है। भद्रा होने के कारण होलिका दहन को लेकर विद्वानों के अलग-अलग मत है।
ज्योतिषाचार्य संजीव थापक का कहना है कि 17 मार्च यानी गुरुवार को रात्रि 8:45 से 10:15 बजे तक तुला लग्न में होलिका दहन का शुभ मुहूर्त होगा। दोपहर 1:29 से भद्रा रात्रि 1:09 बजे तक चलेगी। इस समय मे कोई भी शुभ कार्य वर्जित है। अत:होलिका दहन भी वर्जित है पर भद्र पुच्छ में कार्य शुभता को प्राप्त होते हैं। शास्त्रों के अनुसार यदि भद्रा निशीथ काल के बाद तक रहे तो ऐसी स्थिति में भद्रा का मुंह छोड़कर होलिका दहन करना उचित है। निर्णय सिंधु के अनुसार शुक्ल पक्ष की भद्रा सर्पिणी व कृष्ण पक्ष की भद्रा वृश्चिकी कहलाती है। अत: होलिका दहन का शुभ समय रात 8:45 बजे से से 10:15 तक तुला लग्न में विशेष शुभ है।
होलिका दहन के शुभ मुहूर्त को लेकर ज्योतिर्विद संजय रावत शास्त्री ने बताया कि फाल्गुन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि 17 मार्च की दोपहर 1:29 से लेकर 18 मार्च की दोपहर तक रहेगी। पर 17 मार्च की दोपहर 1:14 से ही भद्रा काल प्रारंभ हो जाएगा जो रात्रि 1:07 बजे तक रहेगा। भद्रा काल के चलते उक्त समय के बीच होलिकादहन शुभ नहीं है। कहा कि शास्त्रों के अनुसार भद्रा काल में होलिका दहन निषेध है। अत: 17 मार्च को रात्रि 1:07 बजे के बाद ही होलिका दहन शास्त्र सम्मत है।