जालौन। एलआईसी व केडीआईईए (कानपुर डिवीजन इंपलाइज एसोसिएशन यूनिट ) के सहयोग से रविवार को ब्लॉक परिसर में कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कवियत्री प्रिया श्रीवास्तव दिव्यम ने पढ़ा कि प्रीत की रीत आकर निभा जाओ तुम, मैं बनूं इक गजल गुनगुना जाओ तुम।
कानपुर से आए कवि कुमार सूरज ने पढ़ा चांदनी रात है सितारे लिए, तट नदी के खड़े हैं किनारे लिए, सब सलामत रहें दुआ कीजिए हम तुम्हारे लिए तुम हमारे लिए। विपिन मलिहाबादी ने जिंदगी जीना है तो इंसान होना सीखे, सब कुछ समझकर भी नादान होना सीखो’ पढ़ा तो श्रोता भावविभोर हो गए। पवन सबरस के गीत ‘मैं खड़ार हूं डगर पर सफर के लिए, साथ कोई नहीं हमसफर के लिए, जिंदगी में नहीं शेष कुछ भी रहा, सिर्फ आंसू बचे हैं नजर के लिए’ को सुनकर श्रोताओं की आंखें नम हो गईं। जितेंद्र लल्ला ने पढ़ा ‘चंदन है पानी है और क्या, दुनियां कहानी है और क्या। शाहिद महक ने ‘डर मुझे भी लगा फासला देखकर, पर मैं बढ़ता गया रास्ता देखकर’ पढ़कर महफिल लूट ली। शिवराम शांति आगरा ने सुनाया-सियायत जहर ये घोले इसे सब जन पिएं कैसे, करें गंभीर घावों को बताओ ये सिएं कैसे। संचालन कवि मुकेश श्रीवास्तव ने किया। इस दौरान शाखा प्रबंधक आरएन गौतम, महेंद्र पाटकार मृदुल, सुशील कुशवाहा, अफसार अहमद खान, पवन प्रताप आदि मौजूद रहे।