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Jalaun News: नहर की पटरी टूटी, 100 बीघा गेहूं की फसल जलमग्न

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फोटो -10 मनोज मोनस
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रामपुरा। क्षेत्र में रविवार की रात टीहर पुल से पचोखरा पुल की ओर नहर की पटरी टूट गई। इससे करीब 100 बीघा गेहूं समेत अन्य फसलें पानी में डूब गईं। अचानक पानी खेतों में घुसने से खड़ी फसल चौपट हो गई।
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रामपुरा क्षेत्र में सिंचाई मुख्य रूप से नहर पर ही निर्भर है। नहर में क्षमता से अधिक पानी छोड़े जाने से दबाव बढ़ा और पटरी टूट गई। पानी का बहाव सीधे आसपास के खेतों की ओर मुड़ गया। इससे वीर सिंह, कमलापत, अक्कू, बीरेंद्र, गौरव सहित कई किसानों की फसलें बर्बाद हो गईं। सुबह जब किसान अपने खेतों पर पहुंचे तो चारों ओर पानी भरा देख मायूस हो गए। किसानों का कहना है कि वे पहले से ही कई समस्याओं से जूझ रहे हैं। अब तैयार फसल बर्बाद होने से उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
ग्रामीणों ने बताया कि पिछले वर्ष भी इसी स्थान पर नहर की पटरी दो बार टूट चुकी है। यह समस्या हर साल दोहराई जा रही है, लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं किया जा रहा। किसानों का आरोप है कि विभाग केवल मरम्मत कर औपचारिकता पूरी करता है। असल समस्या जस की तस बनी रहती है। किसानों ने विभाग से पटरी को मजबूत कर स्थायी समाधान करने की मांग की है।
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सुबह खेत पर पहुंचे तो फसलों में भरा था पानी

किसानों ने बताया कि रात तक वह खेतों में ही थे, लेकिन तब तक कोई समस्या समझ में नहीं आई। सुबह जब खेतों की ओर पहुंचे तो देखा कि खेत जलमग्न थे, चारों ओर पानी ही पानी दिखाई दे रहा था। किसी तरह खेतों से पानी निकालने की कोशिश की, लेकिन वह नहीं निकल सका। किसान रामऔतार, सेवाराम, सुख दयाल आदि का कहना है कि वैसे ही वह बेमौसम की मार व अन्य समस्याओं से जूझ रहे थे, ऊपर से पटरी फट जाने से उन्हें खासा नुकसान हो गया है।



बोले किसान


फोटो - 09 अरविंद परिहार
हर साल दोहराई जाती है घटना

रात में तेज आवाज सुनाई दी तो लोग मौके पर पहुंचे। तब तक पानी खेतों में फैल चुका था। पिछले साल भी यहीं पटरी टूटी थी। हम लोगों ने खुद जान जोखिम में डालकर पानी का रुख मोड़ा था। विभाग बाद में आता है। अगर समय रहते पुख्ता इंतजाम किए जाएं तो फसलें बच सकती हैं।
- अरविंद परिहार



फोटो -10 मनोज मोनस
फसल बचाने की सता रही चिंता
गेहूं की फसल पकने की स्थिति में थी। पानी भरने से दाना खराब होने का खतरा है। करीब 100 बीघा में खड़ी फसल को नुकसान हुआ है। किसानों की सालभर की मेहनत पर पानी फिर गया है। हर बार अस्थायी मरम्मत की जाती है, लेकिन स्थायी समाधान नहीं होता।
- मनोज मोनस




वर्जन

जिस स्थान पर पटरी टूटी है, वहां कुलावे पर पहले से एक पाइप पड़ा था। किसानों द्वारा एक और पाइप डाल देने से मिट्टी ढीली हो गई, जिससे पटरी कमजोर पड़ गई। मौके पर बोरियां लगाकर पटरी को पक्का कर दिया गया है और स्थिति नियंत्रण में है।
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- जितेंद्र कुमार, एसडीओ, नहर विभाग

फोटो -10 मनोज मोनस

फोटो -10 मनोज मोनस

फोटो -10 मनोज मोनस

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