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डग्गामार वाहनों ने तोड़ दी रोडवेज की कमर

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उरई। डग्गामार पर सख्ती बरतने के शासन के निर्देश के बाद भी जिले में प्रशासन और परिवहन विभाग हीलाहवाली कर रहा है। डग्गामार न सिर्फ जिला मुख्यालय पर कब्जा जमाया हुआ है बल्कि कोंच, जालौन और माधौगढ़ में भी इनकी मनमानी चल रही हैं। रोडवेज विभाग की कमर तोड़कर रख दी है। रोडवेज को अपनी लंबी दूरी की बसों को बंद करना पड़ा है। इसको लेकर यूनियन ने कई बार आरटीओ और प्रशासन से कार्रवाई की मांग की पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।
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उरई से जयपुर, भोपाल, दिल्ली, अहमदाबाद के लिए बसों का संचालन किया जा रहा है। माधौगढ़ से दिल्ली, जयपुर और अहमदाबाद के लिए निजी बसें संचालित की जा रहीं हैं। कोंच से भी दिल्ली सहित कई बड़े शहरों के लिए बसें संचालित की जा रहीं हैं। रोडवेज ने उरई से दिल्ली, उरई से कैलादेवी, जालौन की माता मंदिर से झांसी और रामपुरा से झांसी बसें चलाईं थीं। साथ ही जगम्मनपुर से उरई शटल बस शुरू की गई थी। यूपी रोडवेज एंपलाइज यूनियन शाखा उरई के अध्यक्ष अंकित पटेल ने बताया कि उरई से कैलादेवी और उरई से दिल्ली जाने वाली बसों से क्षेत्रीय जनता को काफी सहूलियत थी। उरई से दिल्ली जाने वाली बस की भी अच्छी आमदनी थी पर डग्गामार बसों की वजह से बंद करनी पड़ी। इस मामले में आरटीओ और प्रशासन से यूनियन ने कई बार कार्रवाई की गुहार लगाई पर सुनवाई नहीं हुई।
इस मामले में एआरटीओ प्रवर्तन उमेश कुमार सिंह ने कहा कि शहर में काफी डग्गामार बसों पर कार्रवाई की गई है। हम शहर में ही कार्रवाई में लगे रहते हैं। अब बाकी कस्बों की तरफ भी ध्यान देंगे।
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जैसा सीजन वैसा किराया
डग्गामार बसों का सीधा हिसाब है यात्री जितने अधिक उतना अधिक किराया। दिल्ली जाने वाली बसों में स्लीपर और बैठने वाली सीट मुहैया कराते हैं। सहालग, त्यौहार के समय में इन बसों का किराया बढ़ जाता है। स्लीपर में दो की जगह चार यात्री बैठाते हैं। किराया भी ड्योढ़ा वसूलते हैं। रोडवेज बस बंद हो जाने से यात्रियों के पास कोई विकल्प भी नहीं है।
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स्थानीय यात्रियों को दिक्कत
रोडवेज बसें बंद होने से स्थानीय यात्रियों को काफी दिक्कत हो गई है। उरई से जगम्मनपुर और उरई से कोंच के लिए यात्रियों को निजी बसों के सहारे ही सफर पूरा करना पड़ता है। रोडवेज बसों के संचालन से यात्री आधे समय में ही अपने गंतव्य तक पहुंच जाते थे।
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