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भाजपा व बसपा के गठंबंधन से खिला कमल

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उरई। जिले में भाजपा प्रत्याशी की बड़ी जीत की मुख्य वजह अंदर खाने से बसपा के समर्थन को माना जा रहा है। परिणाम देखने के बाद राजनीति के जानकारों का मानना है कि बसपा के लगभग सभी प्रत्याशियों ने भाजपा को वोट दिया है।इस कारण भाजपा प्रत्याशी की बड़ी जीत हुई है।
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बता दें कि भाजपा प्रत्याशी को बसपा के वोट मिलने की दो प्रमुख वजह भी है। पहली वजह दो साल पहले स्वयं घनश्याम अनुरागी बसपा छोड़ भाजपा में आए थे। उनके संबंध बसपा में भी जरूर रहे होंगे। दूसरी वजह प्रतिद्वंदी बृजलाल खाबरी स्वयं हो सकते हैं। जानकारों के मुताबिक बृजलाल खाबरी एक वक्त में बसपा से ही राज्य सभा सदस्य रहे हैं। फिर उन्होंने पार्टी का दामन छोड़ा और कांग्रेस के पाले में चले गए। इससे भी बसपा हाईकमान उनसे नाराज था। फिर रही सही कसर जिला पंचायत के चुनाव में उन्हें मिले सपा के समर्थन ने पूरी कर दी। इसके बाद ही माना जा रहा था कि बसपा का रुझान भाजपा की ओर होना तय है। बसपा ने अधिक सीट होने के बाद भी अपना कोई प्रत्याशी नहीं खड़ा किया था। जिसका परिणाम यह रहा कि बसपा ने खुलकर तो भाजपा का साथ नहीं दिया। लेकिन परिणाम साफ बता रहे हैं कि बसपा का वोट भी भाजपा के खाते में गया और चुनाव में कमल खिल सका।
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सीटों पर एक नजर
कुल सीटें 25
बसपा 07
भाजपा 06
सपा 04
कांग्रेस 01
निर्दलीय व अन्य- 07
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टूटा सत्ता पक्ष से कुर्सी छिनने का मिथक
भाजपा की जीत ने पिछले दो चुनावों में सत्ता पक्ष की हार का मिथक भी तोड़ दिया है। बता दें 2010 में जब बसपा की सरकार थी, तब सपा से शिशुपाल यादव अध्यक्ष का चुनाव जीते थे। इसके बाद 2016 के उपचुनाव में जब सपा सत्ता में थी तो भाजपा के समर्थन से निर्दलीय प्रत्याशी सुमन निंरजन ने बाजी मारी। इस बार जरूर भाजपा के शासन में सीट उसके ही खाते में गई है।
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