उरई। जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव का घमासान अपने अंतिम पड़ाव पर है। भाजपा हो या सपा समर्थित कांग्रेस प्रत्याशी दोनों ही दल अपने-अपने प्रत्याशी की जीत का दावा कर रहे हैं। हैरत की बात तो यह है कि जिनके बल पर चुनाव जीता जाना है यानि वे 25 मतदाता जिला पंचायत सदस्य। उनमें से अधिकांश जिले से ही बाहर हैं। कोई जयपुर, इंदौर खुजराहो, आगरा और मथुरा के होटलों, फार्म हाउसों में सैर सपाटे का लुत्फ उठा रहे हैं तो कोई किसी कानूनी कार्रवाई के डर से भूमिगत हैं।
बता दें कि शनिवार को जिला पंचायत अध्यक्ष पद का चुनाव है। इसके लिए भाजपा से पूर्व सांसद घनश्याम अनुरागी और सपा के समर्थन पर कांग्रेस से उर्मिला खाबरी आमने-सामने हैं। सदस्यों के चुनाव परिणाम पर नजर डाले तो बसपा को 7, भाजपा को 6, सपा को 4 और कांग्रेस को 1 सीट के अलावा बाकी की सीटें निर्दलीय के खाते में गई थी। परिणाम के बाद भाजपा का दावा है कि उनके साथ दो सदस्य और शामिल हो गए हैं। ऐसे में सपा ने कांग्रेस की उर्मिला को समर्थन देकर संजीवनी का काम किया है। वहीं भाजपा के नेताओं का दावा है कि पार्टी के अलावा बसपा के कई जीते हुए सदस्यों का समर्थन ही नैय्या को पार कराएगा। इस कारण चुनाव अब बेहद रोमांचक मोड़ पर आ गया है। किसका पलड़ा भारी होगा और कौन हल्का इसका परिणाम सामने आने में अब बस एक ही दिन बचा है। माना जा रहा है कि शुक्रवार की देर रात तक बाहर गए हुए सभी सदस्य भी जिले में लौट आएंगे।
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दोनों से बोल रहे सदस्य तुम मेरे हो
एक ओर जहां अंतिम चरण नजदीक देख भाजपा और कांग्रेस (सपा समर्थित) के प्रत्याशियों की रातों की नींदें उड़ी हुई है तो वहीं कुछ सदस्य ऐसे हैं जो दोनों ही प्रत्याशियों से कह चुके हैं कि परेशान मत होना तुम मेरे हो। हकीकत में कौन किसके साथ है, यह शनिवार की शाम तक सामने आ जाएगा। राजनीति के जानकारों का कहना है कि इस चुनाव में धन, बल सभी का खुलकर प्रयोग किया जा रहा है। इस कारण भी जिला पंचायत सदस्यों ने वोटिंग से पहले इधर उधर होना ही मुनासिब समझा है।
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एक दूसरे के समीकरण भांप रहे दिग्गज
भाजपा से पूर्व सांसद घनश्याम अनुरागी हो या फिर कांग्रेस से पूर्व पीसीएस अधिकारी उर्मिला दोनों ही सियासत के मंझे हुए खिलाड़ी है। उर्मिला के पति बृजलाल खाबरी भी न सिर्फ पूर्व सांसद रह चुके हैं बल्कि 2014 के लोकसभा चुनाव में भी वे सपा से घनश्याम अनुरागी के सामने थे। यह बात और है कि उस चुनाव की बाजी भाजपा ने जीती थी। लिहाजा पंचायत चुनाव के दावेदार एक दूसरे के दांवों को खूब जानते हैं और अब एक दूसरे के समीकरण भांपने में लगे हैं।