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भाजपा व कांग्रेस के दावेदारों ने नामांकन कराया

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उरई। जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए शनिवार को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच नामांकन प्रक्रिया पूरी की गई। भाजपा से पूर्व सांसद घनश्याम अनुरागी और कांग्रेस से पूर्व सांसद की पत्नी उर्मिला सोनकर खाबरी ने समर्थकों के साथ पर्चे दाखिल किए। कलक्ट्रेट के चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल तैनात रहा। इस दौरान जिला निर्वाचन अधिकारी प्रियंका निरंजन ने प्रत्याशियों से उनके नामंकन पत्र लिए। देर शाम तक पर्चों की जांच का काम चल रहा है।
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पंचायत चुनाव को लेकर डीएम कोर्ट के नामांकन प्रक्रिया पूर्ण की गई। इस दौरान भाजपा समर्थित प्रत्याशी घनश्याम अनुरागी ने समर्थकों के साथ कलक्ट्रेट परिसर में पहुंचकर नामांकन पत्र दाखिल किया। उनके समर्थक व प्रस्तावक ज्ञान सिंह भदौरिया जिला पंचायत सदस्य चतेला व रणविजय निषाद जिला पंचायत सदस्य परासन रहे। इससे पहले कांग्रेस व सपा से समर्थित प्रत्याशी उर्मिला सोनकर खाबरी ने दो सेटों में अपना नामांकन पत्र जिला निर्वाचन अधिकारी को दिया। इसमे पहले सेट में निर्दोष यादव जिला पंचायत सदस्य बबीना व रामेंद्र त्रिपाठी जिला पंचायत सदस्य शाहपुरा समर्थक व प्रस्तावक रहे। जबकि दूसरे सेट में जिला पंचायत सदस्य चुर्खी से निशा देवी व संजू कठेरिया जिला पंचायत सदस्य सीकरीराजा समथर्क व प्रस्तावक रहे। इस दौरान दोनों ही दावेदारों ने अपनी अपनी जीत के दावे किए।
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फोटो-11 नारेबाजी करते सपाई और कांग्रेसी।
फोटो-12 सपा नेता को समझा कर ले जाते सीओ कोंच।
सपाइयों और कांग्रेसियों से पुलिस की नोकझोंक
प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की
संवाद न्यूज एजेंसी
उरई। नामांकन प्रक्रिया के दौरान भाजपा और कांग्रेस में शक्ति प्रदर्शन अधिक दिखा। भाजपा की ओर से जहां तीनों विधायक और सांसद भी मौजूद रहे। जबकि ंसपा के समर्थन से कांग्रेसी भी उत्साह में नजर आ रहे थे। इसी उत्साह में बेरीकेडिंग के भीतर घुसने को लेकर सपाइयों और कांग्रेसियों की पुलिस से कहासुनी शुरू हो गई। हालात इस कदर बिगड़े की नौबत प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी तक पहुंच गई। जिला परिषद चौराहे के पास सपा नेता एस मौखरी, कांग्रेस के रेहान सिदद्की, आदि की पुलिस से झड़प होने लगी। मामला बिगड़ते देख अपर पुलिस अधीक्षक राकेश सिंह और कोंच सीओ राकेश सिंह ने स्थिति को संभाला और सपाइयों व कांग्रेसियों को समझाबुझा कर शांत कराया। कुछ सपाइयों ने प्रशासन पर सत्ता पक्ष का समर्थन करने का भी आरोप प्रत्यारोप लगाया। पुलिस के खिलाफ भी नारेबाजी की गई।
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भाजपा, कांग्रेस की लड़ाई में निर्दलीय होंगे निर्णायक
उरई। नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद अभी तक सिर्फ कांग्रेस और भाजपा के ही दिग्गज आमने सामने हैं। सपा और बसपा के जिला पंचायत सदस्य दोनों के ही बीच बंटे बताए जा रहे हैं। ऐसे में 25 सीटों वाली जिला पंचायत अध्यक्ष के लिए निर्दलीय सदस्यों की स्थिति काफी महत्वपूर्ण हो गई हैं।
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गाड़ी से लेकर सैर सपाटे तक मिल रहे आफर
नामांकन के साथ ही अध्यक्ष पद के चुनाव का रोमांच भी बढ़ गया है। बताया जा रहा है कि वोट के लिए सदस्यों को हर स्तर के आफर दिए जा रहे हैं। जिसमें लग्जरी गाड़ी का तोहफा और परिवार समेत सैर सपाटा भी शामिल हैं। सियासी गलियारों में तो यह तक चर्चा है कि कुछ सदस्य अभी से ही जिले के बाहर चले गए हैं।
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फोटो-13 नामांकन स्थल के आसपास डटी पुलिस फोर्स।
टकराव की आशंका से चौकन्नी रही फोर्स
उरई। जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए भले ही सिर्फ भाजपा और कांग्रेस के ही उम्मीदवार सामने आए। पर पुलिस किसी भी तरह की हीलाहवाली के मूड में नहीं थी। नामांकन स्थल के आसपास सुरक्षा व्यवस्था का जिम्मा स्वयं अपर पुलिस अधीक्षक राकेश सिंह ने संभाल रखा था। जिसके चलते जिला परिषद चौराहे से लेकर कलक्ट्रेट और पीछे स्थित चुर्खी रोड पर भी पुलिस फोर्स तैनात रही। बता दें कि शुक्रवार को कांग्रेस प्रत्याशी ने प्रेसवार्ता कर आशंका जताई थी कि उन्हें नामांकन करने से रोका जा सकता है। इस कारण सुबह से ही सपाइयों और कांग्रेसियों के हुजूम कलक्ट्रेट के आसपास एकत्र होने लगा था। पुलिस ने समर्थकों की भीड़ को बेरीकेडिंग पर ही रोकना मुनासिब समझा। जिसके चलते चाहे भाजपा हो या कांग्रेस दोनों के ही दावेदार गिने चुने समर्थकों के साथ ही नामांकन स्थल तक पहुंच सके।
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