मुहम्मदाबाद। जालौन और हमीरपुर जिलों को जोड़ने वाला बेतवा नदी पर बना अहम पुल जर्जर हालत में पहुंचने के बाद पूरी तरह बंद कर दिया गया है। पुल की सतह से सरिया बाहर निकल आए थे, एंगल उखड़ चुके थे और ओवरलोड वाहनों के गुजरते ही पूरा पुल कंपन करने लगता था। हालात इतने गंभीर हो चुके थे कि किसी बड़े हादसे की आशंका बनी हुई थी। शासन ने पुल की मरम्मत के लिए 1 करोड़ 54 लाख रुपये की मंजूरी दी है। मरम्मत, रंगाई-पुताई समेत अन्य कार्यों के चलते पुल को 5 फरवरी से 16 मार्च तक पूरी तरह बंद कर दिया गया है। पुल बंद होने से 40 बसों का संचालन बंद हो गया है। संचालकों ने ढाबों पर ताला डालने की योजना बना ली है।
पुल बंद होते ही क्षेत्र की रफ्तार थम गई। उरई से राठ, पनवाड़ी, महोबा, छतरपुर और चित्रकूट जाने वाले सैकड़ों वाहन रोज इसी मार्ग से गुजरते थे। अब सड़कें सूनी पड़ी हैं और कारोबार पर सीधा असर पड़ा है।
सबसे ज्यादा असर होटल-ढाबा संचालकों पर पड़ा है। जालौन जिले की सीमा में इस मार्ग पर करीब एक दर्जन होटल और ढाबे संचालित हैं। ग्राहक न आने के कारण अधिकांश ढाबों पर ताले लटकने की नौबत आ गई है। ढाबा संचालकों का कहना है कि एक ढाबे पर रोजाना 8 से 15 हजार रुपये तक की बिक्री होती थी। पुल बंद होने से प्रतिदिन करीब 80 हजार रुपये का सीधा नुकसान हो रहा है।
उरई-राठ मार्ग पर चलने वाली करीब 40 प्राइवेट बसों का संचालन भी प्रभावित हुआ है। बसें खड़ी हो गई हैं और कई बसें बिना सवारी के वापस लौट रही हैं। यदि बसों का संचालन पूरी तरह बंद रहा तो बस मालिकों को प्रतिदिन करीब चार लाख रुपये तक का नुकसान उठाना पड़ेगा। कई बसें जिला हमीरपुर से जालौन के मुहाना गांव में बच्चों को छोड़ने के बाद खाली लौटने के लिए मजबूर हैं।
पुल बंद होने से जालौन के मुहाना और हमीरपुर जिले के चिकासी, रेहुटा, चुरहा, गोहांड समेत आसपास के कई गांवों का बसों से सीधा संपर्क टूट गया है। इससे स्कूली बच्चों, मजदूरों और मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।