उरई में आयोजित भागवत कथा में प्रवचन करते आचार्य।
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श्रीबांके बिहारी जनकल्याण समिति के तत्वावधान में नेहरू बाल मंदिर अंबेडकर चौराहा में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन कथावाचक पुरुषोत्तम शरण शास्त्री वृंदावन धाम ने श्रीकृष्ण की बाल लीला व गिरिराज की कथा सुनाई। बाल कलाकारों ने भगवान के महारास की सुंदर झांकियों का प्रस्तुतीकरण किया। उधर, जोल्हूपुर में आयोजित ज्ञान यज्ञ का समापन
सोमवार को हो गया। कथावाचक ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने गिरिराज का पूजन किया। सात वर्ष के कान्हा हैं और सात कोस के गिरिराज हैं। फिर भी भगवान ने सात कोस के गिरिराज को सात दिन तक धारण किया और सभी गोकुल वासियों की रक्षा की। इंद्र ने घनघोर वर्षा कराई, किंतु गोकुल पर इसका कोई असर नहीं हुआ। इसके बाद उन्होंने एकादशी व्रत
का महत्व बताया। वहीं, बाल कलाकारों ने भगवान श्रीकृष्ण की महारास व अन्य लीलाओं की झांकी प्रस्तुत की। कथा के अंत में कथा परीक्षित डा. अखिलेश, कल्पना श्रीवास्तव ने महापुराण की आरती उतारी। अंत में प्रसाद का वितरण किया गया। जोल्हूपुर प्रतिनिधि के अनुसार बलखंडी देवी मंदिर में आयोजित भक्ति ज्ञान यज्ञ के समापन पर पंडित अशोक कुमार ने
कहा कि सुदामा को दरिद्रता का दंश झेलना पड़ा। बिना भाव के कीमती सुंदर भोज्य पदार्थ भगवान ग्रहण नहीं करते। यदि भाव में समर्पण व श्रद्धा से भक्ति की जाए तो भगवान प्रसन्न हो
जाते हैं। उन्होंने सुदामा चरित्र व रुक्मिणी विवाह का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि सुदामा बचपन में भगवान श्रीकृष्ण के सहपाठी थे। उस समय कई गल्तियां उन्होंने की। इस कारण उन्हें गरीबी का दंश झेलना पड़ा।