उरई। शहर के कोंच रोड स्थित स्कूल में बैक करते समय कक्षा दो की मासूम छात्रा राधिका की मौत से परिजनों में कोहराम मचा हुआ है। घटना से अभिभावकों में जिम्मेदारों के प्रति आक्रोश है। लोगों का कहना है कि स्कूली वाहनों में चेकिंग को लेकर एआरटीओ कार्यालय हमेशा लापरवाही करता है। हादसा होने के बाद ही जिम्मेदारों को कार्रवाई की याद आती है और खानापूर्ति कर ली जाती है।
कक्षा दो की छात्रा राधिका की मौत ने एआरटीओ विभाग की चेकिंग व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं। लोगों का कहना है कि अगर मानकों की बात करें तो प्रत्येक बस में चालक के साथ कंडक्टर और एक महिला अटेंडेंट होनी चाहिए। लेकिन जिले में संचालित बसों में न तो कंडक्टर रहते हैं, न ही महिला अटेंडेंट।
इसके साथ ही स्कूल बस में जीपीएस सिस्टम होना चाहिए, ताकि अभिभावकों को बच्चों की लोकेशन की जानकारी मिल सके। लेकिन अधिकतर बसों में इसकी भी सुविधा नही है। लोगों का कहना है कि अगर बस में कंडक्टर और अटेंडेंट होता तो शायद राधिका की जान नहीं जाती। लोगों का कहना है कि अधिकारियों के चेकिंग न करने से प्रबंधन भी इस तरफ कोई ध्यान नहीं देता है। इससे हादसे हो जाते हैं। इसके बाद जिम्मेदारों को इसकी ध्यान आती है।