उरई। शहर के पाठकपुरा में बच्चों को पढ़ाने के लिए किराये के मकान में रह रही मांडवी ने सुबह छह बजे ही राधिका और हर्ष को जगा दिया। फिर दोनों बच्चों को तैयार करने के बाद टिफिन तैयार किया और दोनों को एक ही लंच बॉक्स में खाना देने के बाद बस में बैठा दिया। कुछ ही देर बाद स्कूल की तरफ से फोन आया कि राधिका बस से गिर गई है। जल्दी मेडिकल कालेज आ जाओ, जैसे ही वह वहां पहुंचीं तो बेटी को मृत अवस्था में देख बेसुध हो गईं। बोलीं, बिना कुछ खाए ही चली गई थी उसकी बिट्टो।
एट थाना क्षेत्र के बर्ध गांव निवासी कौशलेंद्र सिंह की पत्नी मांडवी बच्चों को पढ़ाने के लिए किराये के मकान में रह रही हैं। बताया कि सुबह छह बजे उसने बेटी राधिका व बेटे हर्ष को जगाया। इसके बाद दोनों को तैयार किया। बेटे हर्ष ने नाश्ता किया पर राधिका ने नहीं किया। बार-बार कहने पर भी जब उसने नाश्ता नहीं किया तो उसने एक ही बॉक्स में खाना रख दिया और कहा कि साथ में खा लेना।
लेकिन जब उन्हें स्कूल प्रबंधन से जानकारी मिली और वह मेडिकल कालेज पहुंची तो बेटी के शव से लिपट गई और बोली कि उठो बिट्टो कुछ तो बोलो। वह बार बार उसके शव को सीने से लगा रही थी कि मानो व जिंदा हो और वह उसे दुलार कर रही हो। उसकी वेदना को देख आसपास खड़े लोग भी अपने आंसू नहीं रोक पा रहे थे। वहीं, विद्यालय की प्रधानाचार्या सिस्टर रफाइल ने बताया कि बस दो विद्यालयों के बच्चों को लाती थी। इस पर उन्होंने संचालक को नोटिस भी जारी किया था कि वह केवल एक ही विद्यालय के बच्चों को लाए। यह हादसा है।
दादी बोली, पहले आरोपी को सजा दो बाद में मेरी बेटी को छूना
राधिका की मौत की खबर जैसे ही उसके गांव में रहने वाली दादी अंगूरी को लगी तो वह मेडिकल कालेज पहुंच गईं और बिलस पड़ी। इसी दौरान पहुंची पुलिस ने शव को उठाने का प्रयास किया तो दादी चिल्लाते हुए बोलीं कि आरोपी को पहले सजा दो फिर उनकी बिट्टो को छूना। बताया कि राधिका प्रतिदिन अपनी गांव में रहने वाली दादी अंगूरी से फोन पर बात कर दादी का हालचाल लेती थी। अंगूरी बार-बार एक ही बात कहे जा रही थी कि भगवान उसे उठा लेता लेकिन उसकी फूल जैसी बिट्टो को छोड़ देता। पोती की मौत से दादी की आंखों के आंसू रुक नहीं रहे थे।
दोबारा चक्कर लगाने की जल्दबाजी में गई मासूम की जान
उरई। कक्षा दो की छात्रा राधिका की बस के पहिए के नीचे आ जाने से मौत की खबर से हर कोई दुखी है। इस घटना में सबसे बड़ी लापरवाही स्कूल प्रबंधन व चालक की सामने आई है। बताया कि जब घटना हुई तब चालक के साथ कोई कंडक्टर नहीं था। इससे चालक ने समझा कि सभी बच्चे उतर गए हैं और उसने गाड़ी बढ़ा दी। इससे घटना हो गई। बस दो स्कूलों में लगी है। दोनों स्कूलों के बच्चों को लाने ले जाने का समय भी लगभग एक ही है। इस वजह से चालक मनु जल्दबाजी में था और उसने यह भी ध्यान नहीं दिया कि राधिका अभी उतर नहीं पाई है और उसने बस चला दी। इससे मासूम की मौत हो गई। लोगों का कहना है कि अगर स्कूल के प्रबंधन की तरफ से भी बच्चों को उतारने वाला कोई होता तो शायद यह मासूम की जान नहीं जाती। वहीं, स्कूल प्रबंधन के पास बस की भी व्यवस्था नहीं है। (संवाद)
स्कूल में हुई घटना से प्रबंधन पर उठे सवाल
उरई। सेक्रेड हार्ट सेंटेनरी स्कूल में कक्षा दो की मासूम छात्रा की मौत से स्कूल प्रबंधन की भी लापरवाही देखने को मिली है। बताया कि जब बच्चे स्कूल पहुंचते हैं तो उन्हें नीचे उतारने के लिए कोई जिम्मेदार नहीं होता है। इससे वह जल्दबाजी में कई बार गिर भी जाते हैं। लोगों का कहना है कि अगर बस में कंडक्टर नहीं था तो सोमवार को स्कूल प्रबंधन की तरफ से ही अगर कोई खड़ा हो जाता तो शायद राधिका की जान बच जाती। (संवाद)