मोहर्रम शुरू होने के साथ ही कारीगर ताजिया बनाने में दिन-रात जुटे हुए हैं। ताजिया बनाने वाले कारीगर मुहम्मदाबाद में दो महीने से डेरा डाले हुए हैं। इस बार कारीगर बेहतरीन नक्शे के आकार का ताजिया बना रहे हैं।
मुहम्मदाबाद के ताजिये बेमिसाल माने जाते हैं।
गांव स्थित इमामबाड़े में चार कारीगरों की टोली दिन रात ताजिया बनाने में जुटी है। ये कारीगर ताजियों को बनाने में अपना हुनर दिखाने में लगे हैं। मुहम्मदाबाद में मोहर्रम की 9 व 10 तारीख को ताजिये निकाले जाते हैं। जालौन के 47 वर्षीय मुहम्मद हनीफ मंसूरी अपने तीन बेटों के साथ दो महीने से यहां आकर ताजिया बनाने में जुटे हैं।
उनका कहना है कि यह कार्य उनके यहां तीन पीढ़ी से हो रहा है। उनके उस्ताद सुबराती ने इस कार्य में उन्हें पूरा हुनर सिखाया है। उन्होंने बताया कि इस बार वह कारीगरी का ऐसा हुनर दिखाएंगे कि लोग हैरत में पड़ जाएंगे। तकरीबन 20 से 22 फुट ऊंचे ताजिये में गुंबद कुछ अलग ही ढंग से बना कर तैयार कर रहे हैं।
ताजिया निर्मित करने में बांस, रंगीन कागज, रंगीन पन्नी, प्लास्टिक की गेंदे, प्लाई, किरकिरी कागज एवं थर्मोकोल आदि का प्रयोग किया जा रहा है। वहीं कारीगरों ने बताया कि इस बार उन्हें जनपद जालौन के साथ बाहरी जिलों में भी ताजिया बनाने के लिये बुलाया गया है। उनकी देखरेख में कई जगहों पर ताजिया बनाने का कार्य जोरों पर है।