रामलीला महोत्सव में राम वन गमन व दशरथ के प्राण त्यागने की लीला का मंचन किया। लीला में दर्शाया गया कि राम के वन गमन पर राजा दशरथ अशक्त होकर शैया पर पड़े राम-राम का उच्चारण कर रहे हैं। उन्हें श्रवणकुमार के अंधे माता-पिता का दिया गया श्राप बार-बार स्मरण हो रहा है।
राम के वन जाने से दुखी दशरथ का अंतत: निधन हो जाता है और कुल गुरु वशिष्ठ ननिहाल से भरत-शत्रुध्न को बुलाने के लिए दूत भेजते हैं। भरत ने अयोध्या आकर जब राम के वनवास की खबर सुनी और इसका कारण माता कैकेयी को जाना तो उन्होंने अपनी माता को खूब खरी खोटी सुनाई।
गुरु के आदेश पर भरत अपने दिवंगत पिता का अंतिम संस्कार करते हैं। दशरथ का किरदार रामकिशोर पुरोहित, सुमंत्र का राजेन्द्र भारद्वाज, वशिष्ठ का संतोष त्रिपाठी, केवट का गौरीशंकर झा, कौशल्या मृदुल दांतर्रे, कैकेयी अतुल शर्मा, सुमित्रा मिरकू महाराज ने निभाया।
उधर, रामलीला के कला विभाग के अध्यक्ष रमेश तिवारी व मंत्री नरोत्तम स्वर्णकार ने बताया कि 17 अक्तूबर को रामलीला रंगमंच पर रात्रि ठीक 8 बजे से ऋषि संवाद लीला का मंचन किया जाएगा। इसमें वनवासी राम ऋषियों मुनियों के सानिध्य में ज्ञान चर्चा करेंगे। साथ ही जयंत उद्घार लीला का भी मंचन किया जाएगा।